दोपहर की झपकी
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क्या सभी के लिए जरूरी है दोपहर की नींद?
हमारी देसी पद्धति में दिन की नींद को हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जाता। इसलिए पुराने वैद्य कहा करते थे कि दिन में सिर्फ बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या बीमार लोगों को ही सोना या आराम करना चाहिए। लेकिन अब लाइफस्टाइल में आये परिवर्तनों ने दिन की इस झपकी को कई लोगों के लिए जरूरी बना डाला है। तो अगर आपको झपकी लेना ही हो तो इन बातों का ख्याल जरूर रखें-
- आधा-एक घण्टे से ज्यादा देर की झपकी न लें। इससे ज्यादा देर सोने से आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक पर गलत असर पड़ेगा। यह याद रखें कि प्राकृतिक हिसाब से नींद के लिए रात ही बनी है। इसलिए कोशिश करें कि रात को ही भरपूर नींद लें।
- दोपहर में 3 बजे के बाद न सोएं। यह बात बच्चों पर भी लागू होती है। अगर आपका बच्चा स्कूल से 3 बजे के बाद घर लौटता है तो उसे रात में जल्दी सोने की आदत डालें, बजाय दिन में सुलाने के। दिन में 3 बजे के बाद सोने से आपकी रात की नींद में व्यवधान आ सकता है।
- जब भी झपकी लें, आपके आस पास का माहौल शांत और आरामदायक होना चाहिए। ताकि आप एकदम सुकून के साथ झपकी पूरी कर सकें। इससे आपके दिमाग को पूरा आराम मिलेगा और उठने पर आप तरोताजा महसूस करेंगे।
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