इकजुट जम्मू के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
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इकजुट जम्मू के अध्यक्ष, अधिवक्ता अंकुर शर्मा ने कहा कि यह शर्म की बात है कि जम्मू को एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा से बाहर कर दिया गया है। कहा कि सभी राष्ट्रवादी ताकतें 24 जून को एक काला दिन के रूप में मना रही हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। हमारे सभी कार्यकर्ता तभी आराम करेंगे जब नई दिल्ली में जम्मू संभाग को कश्मीर से अलग कर दिया जाएगा।
उधर, कश्मीरी प्रवासी वापसी व पुनर्वास समिति के अध्यक्ष सतीश महलदार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक विश्वास बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य का दर्जा खोना जम्मू-कश्मीर के लोगों की शिकायत है, क्योंकि इसने उन्हें एक निश्चित स्थिति और प्रत्यक्ष शक्ति से वंचित कर दिया। जम्मू-कश्मीर के लोग दशकों से पीड़ित हैं, खासकर आतंकवाद ने राजनीतिक और जनसांख्यिकीय मानचित्र को प्रभावित किया। जो हमारा हक है, उसे वापस देने का यह एक उपयुक्त समय है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द से जल्द घोषित किया जाना चाहिए। लेकिन, राज्य के दर्जे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
हमारी मांग है कि अल्पसंख्यकों और वंचित समुदायों को गारंटीकृत और संरक्षित अधिकार मिलें। नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग की स्थापना में स्थानीय लोगों को वरीयता मिले। भूमि की सुरक्षा के साथ ही विधानसभा में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व हो। अब समय आ गया है कि मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को राहत देने के लिए कुछ साहसिक पहल करे।