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सियासी हलचल: दिल्ली में बैठक और जम्मू में प्रदर्शन का दौर, देखें प्रदेश का माहौल और पल-पल का अपडेट

Thu, 24 Jun 2021 11:29 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पीएम आवास में जम्मू-कश्मीर के नेताओं से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : PTI
दिल्ली में सर्वदलीय बैठक से पहले महबूबा मुफ्ती के खिलाफ जम्मू में डोगरा फ्रंट ने प्रदर्शन किया। लोगों ने पीडीपी मुखिया के खिलाफ नारेबाजी की। अपनी मांगों को लेकर कश्मीरी पंडितों ने भी प्रदर्शन किया। सरकार से उनका सवाल है कि उनकी मांगें कब पूरी होंगी। इस दौरान उन्होंने सरकार पर अनदेखी का आरोप भी लगाया है। यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज ने सर्वदलीय बैठक में कश्मीरी समुदाय के लोगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। लोगों ने कहा कि सरकार जिन लोगों से बात कर रही है उन्होंने 32 सालों से कश्मीरी पंडितों के बारे में नहीं सोचा है। कोई भी पार्टी हमारा पक्ष नहीं रखती, हम खुद अपना पक्ष सरकार के समक्ष रखना चाहते हैं।

जम्मू-कश्मीर के मामले पर पाकिस्तान से बात करने की वकालत के चलते महबूबा मुफ्ती के खिलाफ डोगरा फ्रंट प्रदर्शन किया। महबूबा के साथ उमर अब्दुल्ला और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की। डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने कहा कि महबूबा मुफ्ती पाकिस्तान की भाषा बोलती हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

पढ़िए प्रदेश के सियासी घटनाक्रम से जुड़ा पल-पल का अपडेट...
 
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फारूक अब्दुल्ला - फोटो : ANI
फारूक अब्दुल्ला प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के लिए 11 बजे घर से निकले। फारूक अब्दुल्ला कह चुके हैं कि अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा बहाली की मांग पीएम से बैठक के दौरान उठाई जाएगी। ऐसे में पीएम से बैठक के बाद प्रदेश में कश्मीर बनाम जम्मू का मुद्दा गर्माने के भी आसार बन रहे हैं।

 
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महबूबा मुफ्ती के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के लिए पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गई थीं। राजधानी पहुंचते ही महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से खुले मन से बात करने आई हैं। 

 

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घाटी में सुरक्षा व्यवस्था सख्त - फोटो : बासित जरगर
दिल्ली में सर्वदलीय बैठक के मद्देनजर खासकर घाटी में आतंकी घटनाओं के इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया है। सूत्रों के अनुसार अगले 48 घंटे में कश्मीर में सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड व आईईडी हमले तथा हथियार लूट की घटनाओं को आतंकी तंजीमों की ओर से अंजाम दिए जाने के इनपुट हैं। इसके बाद पूरी घाटी में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया है। साथ ही सुरक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 
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घाटी में सुरक्षा व्यवस्था सख्त - फोटो : अमर उजाला
सभी नेशनल हाई-वे समेत तमाम सड़कों पर नाके बढ़ा दिए गए हैं। जगह-जगह वाहनों की चेकिंग की जा रही है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों के काफिले गुजरने वाले रास्तों तथा हाईवे से जुड़ने वाले रास्तों पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। रोड ओपनिंग पार्टियों को और गहनता के साथ छानबीन करने को कहा गया है। ड्यूटी के दौरान जवानों को पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है।
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इकजुट जम्मू के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
इकजुट जम्मू के अध्यक्ष, अधिवक्ता अंकुर शर्मा ने कहा कि यह शर्म की बात है कि जम्मू को एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा से बाहर कर दिया गया है। कहा कि सभी राष्ट्रवादी ताकतें 24 जून को एक काला दिन के रूप में मना रही हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। हमारे सभी कार्यकर्ता तभी आराम करेंगे जब नई दिल्ली में जम्मू संभाग को कश्मीर से अलग कर दिया जाएगा।

उधर, कश्मीरी प्रवासी वापसी व पुनर्वास समिति के अध्यक्ष सतीश महलदार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक विश्वास बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य का दर्जा खोना जम्मू-कश्मीर के लोगों की शिकायत है, क्योंकि इसने उन्हें एक निश्चित स्थिति और प्रत्यक्ष शक्ति से वंचित कर दिया। जम्मू-कश्मीर के लोग दशकों से पीड़ित हैं, खासकर आतंकवाद ने राजनीतिक और जनसांख्यिकीय मानचित्र को प्रभावित किया। जो हमारा हक है, उसे वापस देने का यह एक उपयुक्त समय है। जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द से जल्द घोषित किया जाना चाहिए। लेकिन, राज्य के दर्जे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।

हमारी मांग है कि अल्पसंख्यकों और वंचित समुदायों को गारंटीकृत और संरक्षित अधिकार मिलें। नौकरियों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग की स्थापना में स्थानीय लोगों को वरीयता मिले। भूमि की सुरक्षा के साथ ही विधानसभा में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व हो। अब समय आ गया है कि मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को राहत देने के लिए कुछ साहसिक पहल करे।
 
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