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Muharram: मोहर्रम के जुलूस में श्रीनगर में फलस्तीनी झंडे लहराए, तिरंगे से जवाब; हजारों अकीदतमंद हुए शामिल

Mon, 15 Jul 2024 12:05 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर

सार

तीन दशक बाद लगातार दूसरी बार सोमवार को श्रीनगर शहर में मुहर्रम का जुलूस निकला। हजारों अकीदतमंदों ने इसमें भाग लिया। आठवें मोहर्रम का जुलूस प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी के गुरु बाजार से बुदशाह और एमए रोड होते हुए डल गेट तक निकाला गया।
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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से मोहर्रम के जुलूस पर तीन दशक से अधिक समय से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के बाद सोमवार को लगातार दूसरे वर्ष शिया मुस्लिम समुदाय की ओर से श्रीनगर में जुलूस निकाला गया। हजारों अकीदतमंदों ने इसमें भाग लिया। इस दौरान फलस्तीनी झंडे लहराए गए, जिसका जवाब एक युवक की ओर से तिरंगा फहरा कर दिया गया। जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। इस बीच आजादारों ने एलजी प्रशासन के ऐतिहासिक फैसले की सरहाना की है। आठवें मोहर्रम का जुलूस प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी के गुरु बाजार से बुदशाह और एमए रोड होते हुए डल गेट तक निकाला गया।

शिया मुस्लिम समुदाय के शोक मनाने वालों (आजादारों) ने 8वें मोहर्रम पर गुरु बाजार से सुबह पांच बजे जुलूस निकाला, जो जहांगीर चौक, बडशाह चौक, लाल चौक, एमए रोड से होते हुए डलगेट पर पहुंचकर संपन्न हुआ। इस दौरान आजादारों को धार्मिक नारे लगाते और हजरत इमाम हुसैन (एएस) की शहादत की याद में मर्सी करते देखा गया। इस बीच जुलूस में शामिल कुछ युवा फलस्तीनी झंडे लहराते नजर आए। लालचौक पर भी फलस्तीन के अलावा हमास और हिजबुल्लाह के समर्थन में नारे लगे। जुलूस को गुरु बाजार से डलगेट तक लालचौक के बीच गुजरने की अनुमति दी गई थी। इसमें शामिल होेने के लिए कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से शिया समुदाय के लोग पहुंचे थे
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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
वली नाम आज़ादार ने कहा, मोहर्रम के जुलूस को पिछले वर्ष पहली बार 1989 के बाद शिया समुदाय को निकालने की अनुमति देना ऐतिहासिक फैसला रहा है। इसे इस बार दोहराया गया। इसका श्रेय शिया-सुनी मुस्लिम समुदाय के आपसी भाईचारे के साथ-साथ विशेष तौर से एलजी प्रशासन को जाता है। प्रशासन द्वारा जुलूस को सुबह 6 बजे से सुबह 8 बजे तक दो घंटे के लिए निकालने की अनुमति दी गई थी। इसलिए निर्धारित मार्गों पर यातायात की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश पहले ही दिया गया था। अन्य वैकल्पिक मार्गों को वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा गया था।
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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
पुलिस ने आजादारों के लिए जगह-जगह लगाई छबील
जुलूस निकालने के लिए श्रीनगर प्रशासन की ओर से 11 शर्तें रखी गई थीं। इनमें से प्रमुख शर्त यह थी कि जुलूस में न तो राष्ट्र विरोधी नारेबाजी होगी न किसी आतंकी संगठन के समर्थन में नारेबाजी ही। वहीं जुलूस के दौरान आजादारों के लिए पुलिस द्वारा जगह-जगह छबील भी लगाई गई थी।

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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
इस बार पिछले साल से अधिक इंतजाम
जुलूस में मौजूद कश्मीर रेंज के आईजीपी वीके बिरदी ने कहा कि सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। ट्रैफिक एडवाइजरी पहले ही जारी की गई थी। 10वें मुहर्रम के लिए भी सुरक्षा के इंतजामों को लेकर तैयारियां की जाएंगी। डिवकॉम वीके बिधूड़ी ने कहा, इस बार पिछले साल से अधिक इंतजाम हैं। सुरक्षा एजेंसियों का बेहतर योगदान है। सब लोगों ने ऐसा माहौल बनाया है। इस मौके पर डीसी बिलाल मोहियुद्दीन भट मौजूद रहे।
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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
बडगाम के कामरान ने गर्व के साथ फहराया राष्ट्रीय ध्वज
बडगाम के युवक कामरान अली मीर ने कहा, मोहर्रम के जुलूस के दौरान श्रीनगर में गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। समर्थन जबरदस्त था। 370 को निरस्त करने से पहले यह संभव नहीं था। यह जुलूस भी अकल्पनीय था। भारत सरकार को धन्यवाद। उन्होंने कहा, मुझे फक्र हो रहा है कि मैंने अपने मुल्क का झंडा फहराया। इमाम हुसैन की शिक्षा है कि अपने वतन से मोहब्बत करें और इंसानियत को अपने दिलों में रखें। हम उनकी इस शिक्षा की पैरवी कर रहे हैं।
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श्रीनगर में मुहर्रम का जुलूस - फोटो : बासित जरगर
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पिछले वर्ष तीन दशक से अधिक के अंतराल के बाद शहर में गुरुबाजार से डलगेट तक मुहर्रम जुलूस निकालने की अनुमति दी थी, जिसे इस बार फिर इजाजत दी गई।
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