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विदेश पहुंच रहे जम्मू-कश्मीर के फल: जम्मू से लीची और स्ट्रॉबेरी, कश्मीर से सेब व चेरी की विदेशों में बनी धमक

Sun, 31 Oct 2021 01:24 PM IST
करिश्मा चिब सतीश वालिया, जम्मू।
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लीची - फोटो : फाइल फोटो
जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से प्रदेश में अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले बागवानी और कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है। विश्व भर में नाम होने के बावजूद रिकॉर्ड उत्पादन पर भी फलों और केसर को सही दाम नहीं मिलते थे। जम्मू-कश्मीर में यह उत्पाद अपनी विशिष्ट पहचान के साथ विदेशों में एयर कारगो से भेजे जा रहे हैं। इससे किसानों की आय में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। एयर कारगो सेवा से इस बार जम्मू से लीची व स्ट्रॉबेरी जबकि कश्मीर से सेब और चेरी को विदेशों में भेजा गया है। सीधे बड़े और अच्छे दाम की गारंटी देने वाले बाजार तक उत्पाद पहुंचने का सबसे ज्यादा फायदा बागवानाें को हुआ है। सरकार ने एयर कारगो सेवाओं में बागवानों को 25 फीसदी सब्सिडी भी दी है, जिससे परिवहन खर्च कम हो गया है। बागवान अब उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर करने पर जोर देने लगे हैं। बागवानी क्षेत्र में अब सघन बागवानी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाई डेंसिटी (सघन बागवानी) के तहत इस बार 25 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। पुनर्गठन से पूर्व सालाना तीन से चार लाख पौधे ही लगाए जा रहे थे। दस लाख पौधों को जम्मू-कश्मीर में ही तैयार किया जाएगा।
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केसर - फोटो : Pixabay
केसर की जीआई टैगिंग ने बढ़ाई आय
विश्व भर में पहचान रखने वाले जम्मू-कश्मीर के केसर को मिलावट और फर्जीवाड़े का शिकार होना पड़ रहा था। कश्मीरी केसर के नाम पर धोखाधड़ी होती थी, जिससे स्थानीय किसानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहे थे। जीआई टैंगिंग के बाद से कश्मीरी को नैफेड के माध्यम से देश भर की मंडियों में भेजा जा रहा है। अच्छी गुणवत्ता की गारंटी मिलने से अब इसके दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। किसानाें की आय पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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मृदा जांच - फोटो : अमर उजाला
जिला स्तर पर मृदा जांच
जम्मू संभाग के सभी दस जिलों की मृदा जांच जम्मू में होती थी। अब जिला स्तर पर मृदा जांच की व्यवस्था की जा रही है। इसी कड़ी में डोडा में प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है।

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स्ट्रॉबेरी की खेती
कृषि क्षेत्र के लिए शुरू हुईं ऑनलाइन सेवाएं
किसानों के लिए डीबीटी योजना शुरू की गई है। लाभार्थी को आर्थिक मदद सीधे खाते में पहुंच रही है। वहीं, खाद-बीज व कीटनाशक विक्रताओं के लाइसेंस भी अब आनॅलाइन बन रहे हैं। इससे किसानों के लिए खेती से जुड़े सामान की उपलब्धता पहले से बेहतर हुई है।
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ऑनलाइन पोर्टल
दो सालों में कृषि क्षेत्र में काफी बदलाव आए हैं। सभी सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है। मंडियों को ऑनलाइन करने से अनाज बेचने की परेशानी हल हुई है। इसके अलावा पैदावार भी बढ़ी है।
- केके शर्मा, निदेशक, कृषि विभाग जम्मू संभाग
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सेब का पेड़ - फोटो : सोशल मीडिया
एयर कारगो सेवाओं से लीची, स्ट्रॉबेरी, सेब और चेरी फसलें विदेशों में भेजी गईं हैं। बागवानी के दायरे को बढ़ाया गया है। पैदावार का लक्ष्य भी पहले की तुलना में ज्यादा हो गया है।
- राम सेवक, निदेशक, बागवानी विभाग

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