नगरोटा के सैन्य यूनिट में हुए आतंकी हमले की जांच तेज कर दी गई है। हमले से एक दिन पहले घटनास्थल और इसके आसपास से हुई मोबाइल कॉल पर पूरी तरह से फोकस किया जा रहा है। लगातार इस मामले में संदिग्धों से पूछताछ जारी है।
विज्ञापन
जरूर हुई है कोई बड़ी चूक
2 of 5
ऑपरेशन के दौरान सेना के जवान
- फोटो : File Photo
काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) जांच कर रही है कि हमले से पहले इलाके में कितने फोन हुए और कहां-कहां पर हुए। इलाके में लगे मोबाइल टावर से पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितनी अज्ञात कॉल हुईं। सूत्रों का यह भी कहना है कि हमला करने वाले तीनों आतंकी दीवार फांद कर यूनिट में दाखिल हुए थे। यूनिट में घुसने के बाद करीब एक घंटे तक आतंकी छिपे रहे।
विज्ञापन
3 of 5
दलबीर सुहाग पहुंचे जम्मू-कश्मीर
- फोटो : ANI
इस दौरान उन्होंने हमला करने के लिए अपना बेस बनाया, ताकि अधिक देर तक लड़ सकें। इसलिए जब आतंकियों ने हमला किया तो उन्होंने पहले मेस को निशाना बनाया। इसके बाद एक कांप्लेक्स में जाकर छिप गए। इसी की वजह से आतंकियों से मुठभेड़ में आठ घंटे से अधिक का वक्त लग गया।
4 of 5
NAGROTA
- फोटो : File Photo
आतंकी कश्मीर, राजोरी-पुंछ की एलओसी या फिर इंटरनेशनल बार्डर से क्रास कर नगरोटा तक पहुंचे। तीनों जगहों में से ही किसी एक जगह से आतंकी पहुंचे हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा को लेकर बड़ी चूक हुई है।
आईबी हो या एलओसी, दोनों तरफ से पहुंचने में काफी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके लिए आतंकियों ने किसी वाहन का सहारा लिया। उन्हें किसी हैंडलर ने नगरोटा तक पहुंचाया। कई कारण हैं, जहां चूक हुई। पुलिस के सुरक्षा तंत्र पर भी इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।