तीन राज्यों की दूरियों को मिटाने वाले उत्तर भारत के दूसरे स्टेयड केबल पुल का काम पूरा हो चुका है। जिसके बाद पंजाब और जम्मू कश्मीर की दूरी मात्र तीन फुट रह जाएगी।
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जो भी इस पुल को देखता है लेने लगता है सेल्फी
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जम्मू संभाग के बसोहली में बने स्टेयड केबल पुल को देखने के लिए अभी से लोग पहुंचने लगे हैं।
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हालांकि पुल पर चल रहे निर्माणकार्य के चलते लोगों को आगे जाने की अनुमति नही है लेकिन फिर भी फोटो खिंचवाकर या सेल्फी लेकर लोग इंजीनियरिंग के इस नायाब नमूने के निर्माण के आखिरी क्षणों को अपने कैमरे में जरूर कैद करना चाहते हैं।
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विशेषज्ञों की मानें तो रावी दरिया पर बन रहा स्टेयड केबल पुल घाटी को जोड़ने वाला बेहतर विकल्प भी साबित हो सकता है बशर्त है कि आगे के मार्गों को दुरूस्त किया जाए।
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बसोहली-बनी-भद्रवाह सड़क संपर्क को पूरा होने में अभी भी दो से तीन साल लग सकते हैं ऐसे में पुल का काम पूरा होने पर यदि वाहनों की आवाजाही शुरू होती है तो न सिर्फ बसोहली बल्कि बिलावर और महानपुर पर भी ट्रैफिक का लोड़ बढ़ेगा।
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रक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण योजना के तहत बीआरओ के अधीन राज्य को हिमाचल और पंजाब से जोड़ने वाला रावी पुल अब बनकर तैयार है।
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व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं लिए रावी दरिया पर अपनी ही तरह का यह पहला और देश का चौथा पुल है जिसे केबल स्टेयिंग तकनीक से तैयार किया जा रहा है जिसमें पिल्लर और सस्पेंशन के लिए तार के जरिए पुल को बांधा जाएगा।
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केबल स्टेड इस पुल का निर्माण 145 करोड़ की लागत से किया जाना है। 592 मीटर लंबे पुल में लगने वाली तार को जापान से आयात किया गया है। डेक लेवल से 88 मीटर ऊंचे टावर स्थापित किए जा रहे हैं।
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पुल पर दोनों ओर 1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ का भी प्रावधान है। इस पुल का निर्माण का काम इरकान-एसपीएस कंस्ट्रक्षन कंपनी को सौंपा गया है।