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Somvati Amavasya 2023: शिव योग में सोमवती अमावस्या, इस विधि से पूजा करने पर बरसेगी पितरो की कृपा

Mon, 20 Feb 2023 03:03 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

साल 2023 की पहली सोमवती अमावस्या पर शिव योग बन रहा है और सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस बार फाल्गुन महीने की अमास्या का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, दान और तर्पण का विशेष फल मिलता है।
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सोमवती अमावस्या पर स्नान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में एक अमावस्या आती है, फाल्गुन माह की अमावस्या 20 फरवरी को है। इस दिन सोमवार होने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है।

भगवान भोलेनाथ की अराधना करने से होगी घर में सुख-शांति
इस साल फाल्गुन अमावस्या में कई विशेष योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और ज्यादा बढ़ जाएगा। गायत्री ज्योतिष अनुसन्धान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि साल 2023 की पहली सोमवती अमावस्या पर शिव योग बन रहा है। 

सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, ऐसे में इस बार फाल्गुन महीने की अमास्या का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, दान और तर्पण का विशेष फल मिलता है और भगवान भोलेनाथ की अराधना करने से घर में सुख-शांति आती है।
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पंडित रामराज कौशिक - फोटो : अमर उजाला
शिव योग-  20 फरवरी सुबह 11 बजकर 3 मिनट से 21 फरवरी सुबह 6 बजकर 57 मिनट तक 
अमावस्या तिथि शुरू - 19 फरवरी शाम 04 बजकर 18 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त - 20 फरवरी 2023 दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर
स्नान, दान का शुभ मुहूर्त - सुबह 07 बजे से 08 बजकर 25 मिनट तक
पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 15 मिनट तक
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धर्मनगरी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या पूजा-विधि
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह उठकर नदी में स्नान करें, इसके बाद पूर्वजों को श्राद्ध कर्म करें। इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप पूजा के समय पितृ सूक्त या पितृ स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं, इससे पितरों की पूजा होती है, वे खुश होते हैं।

कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए उपाय
कालसर्प दोष से राहत पाने के लिए आप सोमवती अमावस्या के भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर सकते हैं। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग को  दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, शक्कर से स्नान कराएं और फिर पंचामृत बनाकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें, इसके बाद 108 बार 'ऊं नम: शिवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें और फिर सफेद फूल के साथ उन्हें जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से कालसर्प दोष का निवारण होता है।

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ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे हजारों श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
अखंड सौभाग्य के लिए
ऐसी मान्यता है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी और अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है, सोमवती अमावस्या पर पीपल पर कच्चा सूत 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा करे और फिर पीपल पर फल अर्पित करके उन्हें जरूरमंदों और कन्याओं को दान कर दें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
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महिला श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हुए - फोटो : अमर उजाला
 सोमवती अमावस्या पर क्या न करें
1. अमावस्या के दिन आप पितरों का अनादर न करें, अमावस्या स्नान के बाद पितरों को जल का तर्पण देना न भूलें इससे पितर नाराज होते हैं।
2. गाय, कौआ, कुत्ता आदि को दिए गए भोजन से पितरों को उसका अंश प्राप्त होता है। इस वजह से अमावस्या के दिन आप इन जीवों को कष्ट न पहुंचाएं। जो भी भोजन बनाएं, उसका एक हिस्सा इन जीवों को भी दे दें। वह अंश पितरों को प्राप्त होगा और वे प्रसन्न रहेंगे।
3. अमावस्या के दिन पितर अपने वंश के द्वारा तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान आदि की प्रतीक्षा करते हैं। जब उनको वह प्राप्त नहीं होता है तो इससे वे दुखी होते हैं और श्राप दे देते हैं।
4. अमावस्या के दिन आप मांस, मदिरा या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन न करें। इससे नकारात्मकता बढ़ती है, यह आपकी उन्नति में बाधक माने जाते हैं।
5. इस दिन ब्रह्मचर्य के नियमों की अवहेलना न करें।
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सोमवती अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
हजारों लोगों ने किया पिंड तारक तीर्थ में स्नान
सोमवती अमावस्या पर सोमवार को पांडू-पिडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा कर पिंडदान किया और मेले में खरीददारी भी की। विशेष दिन होने के कारण यहां देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इसके चलते दिन भर पूजा-पाठ का कार्यक्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। जगह-जगह पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए थे। यहां पर लगे मेले में भी श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। वालंटियर व श्रद्धालुओं ने भी व्यवस्था की कमान संभाली हुई थी।
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