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विश्व जल दिवस: सरोवर में सूख गया ‘अमृत’, कुछ में कीचड़, कहीं गिर रहा नाली का पानी

Thu, 23 Mar 2023 01:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
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अमृत सरोवर तालाब । - फोटो : सोशल मीडिया
आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष 2022 में शुरू हुआ तो तय हुआ था कि जिले के संसदीय क्षेत्र की 75-75 ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर का निर्माण कराकर स्वतंत्रता दिवस पर वहीं ध्वजारोहण होगा। नतीजा यह हुआ कि अमृत सरोवर निर्माण की रफ्तार ध्वजारोहण तक ही सीमित रह गई। इसके बाद जिम्मेदारों ने सरोकार रखना बंद कर दिया। काम ने ऐसी सुस्ती पकड़ी कि अभी तक सिर्फ 244 अमृत सरोवर ही बनकर तैयार हो सके, जबकि अगस्त 2023 तक सभी 1294 ग्राम पंचायतों में निर्माण का लक्ष्य है।

जिन सरोवरों का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, धरातल पर उसकी भी हालत बहुत खराब है। ज्यादातर सरोवर सूखे पड़े हैं तो कई में नाली का गंदा पानी गिर रहा है। कुछ में जमा कीचड़, इनकी खूबसूरती के दावों का सच बयां कर रहा है।

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विश्व जल संरक्षण दिवस के मौके पर अमर उजाला की पड़ताल में यह सामने आया कि पिछले स्वतंत्रता दिवस तक तालाब से तेज ध्वजारोहण के लिए चबूतरे का निर्माण हुआ। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों ने राष्ट्रध्वज फहराया और फिर सरोवर के काम की रफ्तार घटती चली गई। कुछ पंचायतों में निर्माण कार्य पूरा मिला, मगर ज्यादातर जगहों पर तालाब को आकार देकर छोड़ दिया गया है। ज्यादातर तालाबों का पक्का निर्माण बाकी है तो किसी पंचायत में मनरेगा और राज्य वित्त में बजट का रोना रोया जा रहा है।

 
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कैंपियरगंज के लोहरपुरवा गांव के अमृत सरोवर के पानी में जमी गंदगी। - फोटो : अमर उजाला।
वहीं, सरोवर के लिए नोडल बनाए गए मनरेगा विभाग का कहना है कि पिछले साल 2022 में जब योजना शुरू हुई तो जिले के दोनों संसदीय क्षेत्रों में 75-75 अमृत सरोवर बनाए जाने थे। बाद में तय हुआ कि सभी पंचायतों में सरोवर बनाए जाएंगे। इसमें नए तालाब के अलावा पुराने का जीर्णोद्धार भी शामिल है। अब तक 244 तालाब बन गए हैं। करीब 1100 पंचायतों में चयन का काम हो गया है। तय समय अगस्त 2023 तक सभी पंचायतों में तालाब का काम पूरा हो जाएगा।

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कैंपियरगंज ब्लॉक: तालाब में जमी है चार इंच मोटी काई

कैंपियरगंज क्षेत्र के लोहरपुरवा का अमृत सरोवर, विभाग के सभी दावों को मुंह चिढ़ा रहा है। तालाब में चार इंच मोटी काई जमी है। सीढ़ी तो बनी है, मगर उसपर भी मिट्टी की मोटी परत जमी है। बाकी का भी यही हाल है। कहीं तालाब सूखे हैं तो कहीं कीचड़ फैला है। कोई भी वहां बैठ नहीं सकता। ब्लॉक में 35 सरोवर प्रस्तावित हैं जबकि अब तक सिर्फ छह पंचायतों हरनामपुर, लोहरपुरवा, मछलीगांव, मिरिहिरिया, सनगद और सोनौरा बुजुर्ग में कार्य पूरा हो सका है। बैजनाथपुर, राजपुर सहित 12 अमृत सरोवर पर काम चल रहा है। बीडीओ कविता अवस्थी का कहना है कि पानी कम हो जाने के बाद बाकी सरोवरों का भी अप्रैल तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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विकासखंड बेलघाट के ग्राम पंचायत बभनौली में बना अमृत सरोवर। - फोटो : अमर उजाला।
बेलघाट ब्लॉक: सीढ़ी न बेंच, चबूतरा चकाचक
बेलघाट ब्लॉक के बभनौली में अमृत सरोवर के चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। न सीढ़ी बनाई गई है, न कहीं बेंच लगाए गए हैं। अलबत्ता सरोवर किनारे ध्वजारोहण के लिए बना चबूतरा जरूर चमक रहा है। बीडीओ दिवाकर सिंह का कहना है कि ब्लॉक में 89 गांव हैं। इनमें 64 में अमृत सरोवर प्रस्तावित हैं जबकि, अब तक 17 अमृत सरोवर का कार्य पूरा हो चुका है। बाकी पर काम चल रहा है।

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पिपरौली में सरोवर के किनारे हुई इंटरलॉकिंग धंसने लगी है। - फोटो : अमर उजाला।
पिपरौली ब्लॉक: 57 प्रस्तावित, 18 पर काम
ब्लॉक के तीनहरा, खरैला, जैतपुर, बनौडा आदि ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर बनाया गया है लेकिन उनकी देखरेख नहीं होने की वजह से कहीं चारों तरफ झाड़ी उगी है तो कहीं गंदगी का अंबार है। कुछ जगहों पर मानक के अनुरूप पूरा कार्य भी नहीं हुआ। ब्लॉक में 57 अमृत सरोवर प्रस्तावित है जिसमें 18 पर ही काम दिखाई पड़ रहा है। कुछ प्रधानों का कहना है कि धन की कमी से काम प्रभावित हो रहा है। वहीं ब्लॉक के एडीओ पंचायत अरविंद कुमार सिंह का कहना है अधूरे कार्य पूरे कराए जा रहे हैं। जल्द ही प्रस्तावित गांवों में भी काम शुरू कराकर तय समय पर पूरा कर लिया जाएगा।

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बांसगांव ब्लॉक के कोठा गांव के सरोवर में काई और जलकुंभी उगी है। - फोटो : अमर उजाला।
बांसगांव ब्लॉक: झाड़ी के बीच खोजिए ''अमृत''
ब्लॉक में बने ज्यादातर अमृत सरोवरों का हाल खराब है। कहीं झाड़ी उगी है तो कहीं सीढ़ी ही नहीं बनी है। बेंच भी नहीं है। पानी में काई जमी हुई है। ब्लॉक के कोठा गांव में बने सरोवर के किनारे एक अमृत सरोवर का बोर्ड लगा है। चारों तरफ गंदगी फैली है। इंटरलॉकिंग का भी काम पूरा नहीं कराया गया है। पानी में काई और जगह-जगह जलकुंभी फैली है।

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खोराबार के भैरोपुर में प्रस्तावित अमृत सरोवर के किनारे मुर्गे की दुकानें हैं, जो वहां कचरा डालते हैं - फोटो : अमर उजाला।
 खोराबार ब्लॉक: सरोवर में गिराते हैं कचरा
क्षेत्र के भैरोपुर गांव के पोखरे का चयन अमृत सरोवर के रूप में हआ था। योजना के तहत इसका सुंदरीकरण कराया जाना था। जुलाई 2022 में तत्कालीन नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त व मुख्य अभियंता ने इसका शिलान्यास किया। लक्ष्य रखा गया कि 15 अगस्त 2022 तक सुंदरीकरण पूरा कर इसी अमृत सरोवर पर झंडारोहण किया जाएगा। मगर अभी तक कोई बदलाव नहीं दिखाई पड़ा। तालाब का पानी काला पड़ा है और जलकुंभी तैर रही है। पोखरे के किनारे सड़क के पास मीट-मुर्गे की तीन-चार दुकानें हैं जो उनके समेत आसपास के सभी लोग अपना कचरा इसी तालाब में गिराते हैं।

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बड़हलगंज के मकरंदपुर में सूखा पड़ा अमृत सरोवर। - फोटो : अमर उजाला।
बड़हलगंज ब्लॉक: सूखे सरोवरों में खेलते हैं बच्चे
ब्लॉक के चौतीसा, शुक्लपुरी, फरसाड, मकरंदपुर व धोबौली सहित अन्य गांवों में अमृत सरोवरों की स्थिति बहुत खराब है। ज्यादातर सरोवर सूखे हैं। कुछ में तो बच्चे खेलते हैं। ब्लॉक में 138 अमृत सरोवर बनाए जाने का लक्ष्य है। इनमें से 81 तालाबों को अमृत सरोवर योजना के तहत चयनित किया गया है। 20 का निर्माण हो चुका है और 15 का इस्टीमेट तैयार हो चुका है। एडीओ पंचायत वीरेंद्र पांडेय का कहना है कि अभी सरोवरों के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। इसके बाद सूखे सरोवरों में पानी भरवाया जाएगा।

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कौड़ीराम के मलाव गांव में बने अमृत सरोवर के चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। - फोटो : अमर उजाला।
कौड़ीराम ब्लॉक: कराना था मनरेगा से काम, जेसीबी से हुई खुदाई
ब्लॉक के मलांव गांव में बने अमृत सरोवर में पानी तो है मगर चारों तरफ झाड़ियां उगी हैं। सरोवर के किनारे सीढि़यां भी नहीं बनी है। पानी भी गंदा पड़ा है जिससे दुर्गंध आ रही है। बिस्टौली बुजुर्ग में सिर्फ ध्वजारोहण के लिए चबूतरा बनाया गया और सरोवर का गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। पिछले साल से ही यह सरोवर अधूरा पड़ा है। योजना के तहत नियम बनाए गए हैं कि मनरेगा मजदूरों से मिट्टी का काम कराया जाएगा मगर यहां जेसीबी से मिट्टी निकाली गई।

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सरदारनगर ब्लॉक के भाऊंपुर गांव के अमृत सरोवर में कूड़ा फेंका जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला।
सरदारनगर ब्लॉक: काम के लिए बजट का रोना
सरदारनगर ब्लॉक के भाऊपुर में बनाअमृत सरोवर बदहाली का शिकार बना हुआ है। तालाब में कूड़ा फेंका जा रहा है। गांव के प्रधान कृष्ण मुरारी कहते हैं कि बजट के अभाव में कुछ कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जल्द ही करा लिया जाएगा। वहीं सथरी गांव के सरोवर में सीढ़ी नहीं बन सकी है। वहां मछली पाली जा रही है। बीडीओ पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि ब्लॉक में कुल 13 सरोवर बनने हैं। कुछ कार्य अधूरे हैं, जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे।

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गोला ब्लॉक के ककरही में बना अमृत सरोवर में सीढ़ी बन जाए तो इसकी खूबसूरती और बढ़ जाएगी। - फोटो : अमर उजाला।
गोला ब्लॉक: आधे से ज्यादा सरोवरों पर काम नहीं हुआ शुरू
ब्लॉक में कुल 72 सरोवर प्रस्तावित हैं। आधे से अधिक पर काम शुरू ही नहीं हो सका है। जहां काम कराए गए हैं वहां भी अधूरे। कहीं सीढ़ी नहीं बनी तो कहीं बेंच। पौधे तो कहीं लगाए ही नहीं गए। ककरही, ऊंचगांव, खदरा, अहिरौली द्वितीय, मदरिया, कुकुरहा, पकड़ी आदि 19 सरोवरों को पूरा होने का दावा किया जा रहा है। ककरही का अमृत सरोवर अन्य की तुलना में अच्छा है। वहीं देईडीहा, बांहपुर, चड़ेरिया आदि 22 गांव में अभी तक काम नहीं पूरा हो सका है। बीडीओ गोला रघुनाथ सिंह ने बताया कि बचे हुए तालाबों का भी जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा। कुछ पोखरों में पानी है, जिसके सूखने का इंतजार किया जा रहा है।

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