दूसरी लहर में कोरोना ने परिवार के परिवार तबाह कर दिए हैं। कुछ ऐसा ही हुआ है गोरखपुर के दुर्गाबाड़ी निवासी दवा कारोबारी नीरज तिवारी के परिवार के साथ। कोरोना संक्रमण की वजह से एक महीने के अंदर मां, पिता और बहन की मौत हो गई। परिवार के तीन सदस्यों को खोकर नीरज गुमसुम हो गए हैं। जिस विवाहिता बहन की मौत हुई है, उनका मकान बना है और उसमें गृहप्रवेश होना था, लेकिन उनकी गृहप्रवेश की इच्छा अधूरी रह गई।
सबसे पहले नीरज की मां कमला देवी (62) कोरोना संक्रमित हुईं। उनकी सेवा के लिए विवाहिता बेटी आशा पांडेय आ गईं। तीन-चार दिनों बाद पिता शिवजी तिवारी (65) की तबीयत भी खराब हो गई। जांच कराने के बाद उनके भी संक्रमित होने की जानकारी मिली। इस दौरान तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर मां कमला देवी को शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती होने के तीन दिन बाद 16 अप्रैल को उनकी सांसों ने साथ छोड़ दिया।
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शिवजी तिवारी की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
मां के निधन के सदमे से नीरज अभी उबरे भी नहीं थे कि पांच-छह दिनों बाद पिता की तबीयत भी बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन तबीयत ज्यादा खराब होने की वजह से डॉक्टर ने जवाब दे दिया तो परिजन घर लेकर आ गए। 25 अप्रैल को उनकी भी मौत हो गई।
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कमला देवी की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
मां-पिता की मौत के बाद नीरज पर मानो दुख का पहाड़ टूट पड़ा। उधर, होम आइसोलेशन में मां और पिता की सेवा करने वाली उनकी बेटी आशा पांडेय (45) भी कोरोना संक्रमित हो गईं।
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आशा पांडेय की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर आशा पांडेय को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार को सुबह उन्होंने भी दम तोड़ दिया। एक महीने के अंदर परिवार में तीन की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
हिंदू युवा वाहिनी के महानगर संयोजक ऋषि मोहन वर्मा ने बताया कि आशा पांडेय का लच्छीपुर के शास्त्रीनगर में नया घर बना है। 14 मई को गृहप्रवेश था। मां और पिता की मौत की वजह से गृहप्रवेश टाल दिया गया था, लेकिन इसी दौरान उनकी भी मौत हो गई।