फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए गोरखपुर के जंगलों में कैसे आए वनटांगिया परिवार, 22 साल पहले योगी आदित्यनाथ ने दिया था इनको जीवनदान

Mon, 16 Nov 2020 09:16 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
वनटांगियों के साथ दिवाली मनाते सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
ब्रिटिश हुकूमत में जब रेल पटरियां बिछाई जा रही थीं तो स्लीपर के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों से साखू के पेड़ों की कटान हुई। इसकी भरपाई के लिए अंग्रेज सरकार ने साखू के पौधों के रोपण और उनकी देखरेख के लिए गरीब भूमिहीनों, मजदूरों को जंगल में बसाया। ये अलग- अलग गांवों के वो लोग थे जिनके पास जीवनयापन का कोई जरिया नहीं था। साखू के जंगल बसाने के लिए वर्मा देश की टांगिया विधि का इस्तेमाल किया गया, इसलिए वन में रहकर यह कार्य करने वाले वनटांगिया कहलाए। गोरखपुर जिले के कुसम्ही जंगल के पांच इलाकों जंगल तिनकोनिया नंबर तीन, रजही खाले टोला, रजही नर्सरी, आमबाग नर्सरी व चिलबिलवा में इनकी पांच बस्तियां वर्ष 1918 में बसीं।
विज्ञापन

2 of 5
वनटांगिया गावों के लोग। - फोटो : अमर उजाला।
नहीं हारा हौसला, जंगल में बने रहने को दो की जान भी गई
जंगल तिनकोनिया नंबर तीन के पूर्व मुखिया चन्द्रजीत बताते हैं कि साखू के पेड़ों से जंगल संतृप्त हो गया तो वन विभाग ने अस्सी के दशक में वनटांगियों को जंगल से बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसी सिलसिले में वन विभाग की टीम छह जुलाई 1985 को जंगल तिनकोनिया नंबर तीन में पहुंची। न कहीं और घर, न जमीन, आखिर वनटांगिया लोग जाते कहां। उन्होंने जंगल से निकलने को मना कर दिया। जोर जबरदस्ती पर उतारू वन विभाग की तरफ से फायरिंग कर दी गई। इस घटना में परदेशी और पांचू नाम के वनटांगियों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 28 लोग घायल हो गए। इसके बाद भी वन विभाग सख्ती करता रहा। यह सख्ती तब रूकी जब सांसद बनने के बाद 1998 से योगी आदित्यनाथ ने वनटांगियों की सुध ली।
विज्ञापन

3 of 5
वनटांगियों के साथ दिवाली मनाते सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।
एक दशक से वनटांगियों के साथ दिवाली मनाते आ रहे सीएम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वर्ष 2009 से ही वनटांगियां परिवारों के साथ दिवाली मनाते आ रहे हैं। योगी ने यह परंपरा मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी रखी है। हर साल दिवाली पर वह यहां के बच्चों को मिठाई, टॉफी, कापी-किताब और आतिशबाजी का उपहार देकर पढ़ने को प्रेरित करते हैं तो वहीं बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी तमाम सौगात देते हैं। इन गांवों के बच्चे मुख्यमंत्री को टॉफी वाले बाबा कहकर भी पुकारते हैं।

4 of 5
सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
मुख्यमंत्री योगी ने दिलाया राजस्व ग्राम का दर्जा
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने बीते तीन दिवाली में वनटांगिया समुदाय को ढेर सारी सौगातें दीं। लोकसभा में वनटांगिया अधिकारों के लिए लड़ने वाले योगी ने 2007-08 में वन अधिकार संशोधन अधिनियम पास कराया लेकिन जमीनी तौर पर यह लागू हुआ उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद ही। अपने सीएम कार्यकाल के पहले ही साल अक्तूबर 2017 में उन्होंने वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया। इससे सिर्फ गोरखपुर के ही पांच वनग्राम नहीं बल्कि महराजगंज के 18 समेत प्रदेश के सभी वनटांगिया गांवों को मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बच्ची को उपहार देते सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
राजस्व ग्राम घोषित होने के साथ ही वनटांगिया गांवों के लोग हर तरह की सुविधा के हकदार हो गए। तीन साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने वनटांगिया गांवों को आवास, सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और आरओ वाटर मशीन जैसी सुविधाएं मुहैया कराई। वनटांगिया गांवों में आज सभी के पास अपना सीएम योजना का पक्का आवास, कृषि योग्य भूमि, आधारकार्ड, राशनकार्ड, रसोई गैस है। बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, पात्रों को वृद्धा, विधवा, दिव्यांग आदि पेंशन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें