श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान घर-घर छतों पर केसरिया फहराया गया। गांव व मोहल्लों में श्रीराम कार सेवा समितियां बनीं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़कर संगठन को खड़ा किया जाने लगा। जब अयोध्या कूच करने की बात आई तो कारसेवकों को एकत्र करना और उनके जलपान, भोजन और विश्राम की व्यवस्था हुई। यह सारी जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद ने उठाई थी। संगठन के पदाधिकारियों ने जहां फ्रंट पर आकर मोर्चा लिया तो वहीं पर्दे के पीछे से संगठन का एक धड़ा आर्थिक इंतजामों और व्यवस्था में लगा रहा।