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मदद के बदले, बेटे की मौत: बिटिया बोली, पापा तुम तो कहते थे सुधर जाएंगे चाचा, पर वह तो बाबू को ही मार डाले

Fri, 12 May 2023 01:26 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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हरपुर बुदहट में शव पहुंचने के बाद लिपट कर रोटी बहनें। - फोटो : अमर उजाला।
पापा, आप तो कहते थे, चाचा सुधर गए। वह मेहनत-मजदूरी करके जीवन काट रहे हैं, लेकिन इन्होंने तो बाबू की ही जान ले ली। आप ही बताओ, आप को क्या जरूरत थी, मदद करने की। आप ने मदद नहीं की होती तो शायद आज भी राम सिंह जेल में होता और आयुष जिंदा। यह बोल अपहरण के बाद मारे गए आयुष की बड़ी बहन अंबिका के हैं। उसका इकलौता भाई अब इस दुनिया में नहीं है। बहनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है।

मन में एक ही पछतावा है कि पापा ने जिसे अपने भाई की तरह माना और हत्या कर लूट जैसे संगीन अपराध में न सिर्फ जमानत दिलाने में मदद की, बल्कि बाहर आने पर उसे फैक्टरी में नौकरी तक दिला दी। अब उसी ने खुशियां उजाड़ दी। बहनों को अब मुंहबोले चाचा के प्रति गुस्सा है तो गांव वाले भी हैरान हैं। गांव वाले भी बोल रहे हैं, सत्यनारायण सिंह रामसिंह को भाई की तरह मानते थे। दूर के रिश्तेदार थे और इतनी मदद के बाद ऐसा कर दिया तो अब कौन किसकी मदद करेगा?

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आरोपी राम सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
उधर, बृहस्पतिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद शव गांव में पहुंचा तो एक बार फिर चीख पुकार मच गई। रिश्तेदार, पड़ोसी ही नहीं आसपास के गांव वाले भी आयुष का शव देखकर रो पड़े। सभी परिवार वालों को सांत्वना देते रहे। आयुष की बहनें रोते-रोते बदहवास हो जा रहीं थीं। पिता सत्यनारायण खुद को संभालते हुए बच्चों को भी संभालते नजर आए।

हत्या और लूट में जेल गया था राम सिंह
राम सिंह गोरहडीह गांव का ही रहने वाला है। उसकी अभी शादी नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक, साल 2016 में उसने खोराबार इलाके में ट्रक मालिक की हत्या कर सरिया लूट की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में वह जेल गया था। साल 2020 में जमानत पर जेल से बाहर आया। उसके जमानत पाने में सत्यनारायण ने मदद भी की और फिर जेल से बाहर आने के बाद जिस फैक्टरी में सत्यनारायण काम करते हैं, वहीं उसे भी नौकरी दिलाई। इसके बाद दोनों साथ ही आते-जाते थे, लेकिन बुधवार को राम सिंह ने साजिश रचकर हत्या कर दी।
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हरपुर बुदहट में मौत के बाद जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।
रात के इंतजार में था, इसके पहले ही पकड़ा गया
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने आयुष का अपहरण करने के बाद तय किया था कि रात के अंधेरे में उसे लेकर गांव से कहीं दूर जाएगा। इसके बाद फिरौती के चार लाख रुपये की मांग करेगा। लेकिन, इसके पहले ही बुधवार शाम पांच बजे ही पुलिस ने उसे अपहरण के आरोप में दबोच लिया। संदेह के आधार पर पकड़ने के बाद पुलिस ने पूछताछ की, लेकिन वह टूट नहीं रहा था।

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उसका मुंह खुलवाने में पुलिस को करीब छह घंटे लग गए और फिर रात 11 बजे उसने बच्चे के बारे में पुलिस को जानकारी दी। तब तक बहुत देरी हो चुकी थी, मुंह में कपड़ा ठूंसे जाने की वजह से उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। आनन-फानन उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो दिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई।
 

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पीड़ित परिवार से बातचीत करते डीएम कुष्णा करुणेश और एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर। - फोटो : अमर उजाला।
सुधरा नहीं था रामसिंह, कई बार की अपहरण की कोशिश
दरअसल, गांव वालों के मुताबिक रामसिंह कभी सुधरा ही नहीं था। वह अक्सर बच्चों के अपहरण की कोशिश करते हुए पकड़ा गया, लेकिन तब लोगों ने ध्यान नहीं दिया। बताया जा रहा है कि जून 2022 में रामसिंह ने एक बच्चे को साथ लेकर जा रहा था, लेकिन गांव वालों ने देख लिया, तब छोड़ दिया था। अभी करीब 20 दिन पहले भी वह एक बच्चे को गाड़ी पर बैठाकर ले जा रहा था। हरपुर में किसी परिचित ने देख लिया था, उसके बाद बच्चा घर वापस आया था। इस तरह से उसने कई बार कोशिश की, लेकिन इस बार सफल हो गया।

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मृतक आयुष की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
तीन बहनों के बाद पैदा हुआ था आयुष
सत्यनारायण सिंह की दो शादी हुई है। पहली पत्नी से तीन बेटियों अंबिका (15), अंकिता (12), सुकन्या (9) के बाद आयुष का जन्म हुआ था। इसके कुछ दिन बाद आयुष की मां की मौत हो गई थी। हालांकि, सत्यनारायण सिंह ने बच्चों की परवरिश के लिए फिर दूसरी शादी कर ली। जिससे फिर एक बच्ची अनामिका (5) का जन्म हुआ। कुछ दिनों बाद दूसरी पत्नी की भी मौत हो गई। तभी से सत्यनारायण गांव पर ही रहकर खुद ही बच्चों की देखभाल करते हैं।

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बाएं से मृतक मासूम और आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
पहले भी हुई हैं बच्चों की हत्याएं
  • 6 अप्रैल 2022 : बांसगांव इलाके के बहोरवा गांव में सात वर्षीय अनिरुद्ध की बेरहमी से हत्या कर दी गई। चार दिन से लापता इस बच्चे की घर से डेढ़ सौ मीटर दूर झाड़ियों में लाश मिली। बच्चे के मुंह में कपड़ा ठूंसा था और दोनों हाथ बंधे थे। पुलिस अब तक हत्या का पर्दाफाश नहीं कर सकी।
  • एक सितंबर 2021 : चौरीचौरा इलाके के शिवपुर से रात में करीब दो बजे बदमाशों ने बरामदे में सो रहे छह साल के प्रतीक निषाद का अपहरण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने छह घंटे के भीतर बच्चे को बरामद कर लिया। एक नजदीकी महिला बच्चे का अपहरण कर उसे ले जा रही थी। एक तांत्रिक के कहने पर उसने यह कदम उठाया था। देवरिया निवासी तांत्रिक के पकड़े जाने पर घटना का पर्दाफाश हुआ।
  • 18 अगस्त 2021 : पिपराइच के मटिहनिया निवासी पांच वर्षीय मासूम गजेंद्र निषाद रात में मां के पास सोया था। वह अचानक लापता हो गया। 19 अगस्त सुबह घर के पास ही गन्ने के खेत में उसकी लाश मिली। उसके बदन पर कपड़े नहीं थे। मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था और दोनों हाथ काले कपड़े से बांधे गए थे। पुलिस ने तांत्रिक संतोष निषाद को गिरफ्तार कर हत्या का पर्दाफाश किया।
  • 6 जुलाई 2021 : बांसगांव के विशुनपुर में ब्रम्हानंद विश्वकर्मा के बेटे सात वर्षीय आलोक की अपहरण करके बदमाशों ने गला रेतकर हत्या कर दी। उसकी लाश भी कुछ दिन बाद झाड़ियों में मिली। पड़ोस में रहने वाले लवेश ने घटना को अंजाम दिया था। वह अपनी दुकान चलाने के लिए तंत्र साधना करना चाहता था। इसलिए उसने बच्चे की हत्या कर दी।
  • 24 मार्च 2021 : बेलीपार के भीटी गांव में डेढ़ वर्ष के अनिकेत की लाश घर के पास पानी की टंकी में मिली। जांच में सामने आया कि उसकी मां ने ही वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने मां को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
  • 7 अक्तूबर 2020 : सिकरीगंज इलाके के बारी में जय प्रकाश के 12 साल के बेटे आदर्श का अपहरण करके बदमाशों ने हत्या कर दी। उसकी लाश धान के खेत में मिली। दो युवक मुकेश और गौतम पकड़े गए। दोनों ने फिरौती और पूजा पाठ के चक्कर में बच्चे की हत्या की बात पुलिस को बताई।

 
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