उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गगहा के जगदीशपुर भलुआन गांव के ही रहने वाले विजय प्रजापति पर कुल 17 मुकदमे दर्ज थे। गगहा थाने का हिस्ट्रीशीटर होने के साथ ही वह देहरादून का गैंगस्टर भी था। उसने जरायम की दुनिया में कदम देहरादून में ही रखा। 2015 में उसने देहरादून के कैंट इलाके में अपने एक रिश्तेदार पर हमला कर वसूली की थी। जिसमें देहरादून में ही मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद विजय शातिर लुटेरा बन गया। इसके बाद उसपर गैंगस्टर की कार्रवाई भी की गई थी। वहां पटेलनगर और नेहरू कॉलोनी थाने में भी उसपर वसूली का मुकदमा दर्ज था। गोरखपुर के गगहा, गोला, बेलीपार, बांसगांव में भी विजय पर लूट का केस दर्ज है। इसमें वह गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था। इसके अलावा तिवारीपुर थाने से भी उसे 2018 में लूट में जेल भेजा गया था। बाराबंकी के मसौली थाने से भी वह जेल गया था।
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काजल हत्याकांड।
- फोटो : अमर उजाला।
सबने कहा सुधर जाएगा, पर ऐसा हुआ नहीं
करीब तीन साल पहले बांसगांव में विजय प्रजापति ने अपने एक साथी के साथ लूट की वारदात की थी। इस दौरान उसने गार्ड को गोली भी मार दी थी। भागते समय उसे ग्रामीणों ने घेर लिया था। तब उसकी जमकर पिटाई की गई थी। ग्रामीणों ने उसे बड़ी बेरहमी से मारा था और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस वीडियो को देखने के बाद लोग कहते थे कि अब तो विजय सुधर जाएगा मगर ऐसा हुआ नहीं। जेल से आने के बाद वह फिर से अपराध में सक्रिय हो गया था।
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मृत काजल व आरोपी विजय की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
बदमाश विजय भी था एकलौता, चाचा ले गए शव
विजय प्रजापति भी अपने पिता सुभाष और मां का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें हैं जिनकी शादी हो चुकी है। पोस्टमार्टम के बाद शव लेने के लिए उसके चाचा रामप्रीत व दोनों बहनोई मोर्चरी पर पहुंचे थे। शव को कानूनी कार्रवाई पूरी कर सुपुर्द कर दिया गया। चाचा रामप्रीत गांव वालों से छिप छिपाकर शव लेने गए थे। वह किसी से बात करने को तैयार नहीं थे।
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काजल गोलीकांड।
- फोटो : अमर उजाला।
दो साल बाद पुलिस की गोली से ढेर हुआ बदमाश
करीब दो साल बाद गोरखपुर पुलिस की गोली से फिर एक बदमाश ढेर हुआ है। इसके पहले नौ जून 2019 को शाहपुर में पुलिस और बदमाश विपिन की मुठभेड़ हो गई थी। बच्चे को गोली मारकर भाग रहा विपिन पुलिस की गोली से मारा गया था। हालांकि, बीच में एसटीएफ ने भी परवेज नाम के बदमाश को मार गिराया गया था।
टीम में ये लोग थे शामिल
विजय से मुठभेड़ करने वाली टीम में एसओजी प्रभारी सुशील शुक्ला, स्वाट प्रभारी सादिक परवेज, इंस्पेक्टर गगहा अमित दुबे, दरोगा चंद्रभान सिंह, धीरेंद्र राय, अरुण सिंह, सिपाही राजमंगल सिंह, शशिकांत राय, रसीद अख्तर, सनातन सिंह, धर्मेंद्र नाथ तिवारी, प्रदीप राय, योगेश सिंह, तेज सिंह, जितेंद्र सिंह सरदार, इंद्रेश वर्मा, अरुण यादव, कुतुबुद्दीन शामिल थे।