सब्जपोश हाउस
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लोगों का कहना है कि रौजे के गुबंद में उस जमाने की कुरान शरीफ व हजरत अली के तबरुकात मौजूद है। जौनुपर से गोरखपुर तशरीफ लाए मीर शाह क्यामुद्दीन के दो साहबजादे मीर अहमदुल्लाह व मीर फजलुल्लाह थे। मीर फजलुल्लाह अवध के फौज में जनरल थे, उन्होंने बक्सर के युद्ध में वतन की आजादी के लिए लड़ते हुए शहादत पाई। इनकी कोई औलाद नहीं थी। लिहाजा उस दौर के बादशाह ने मीर सैयद गुलाम रसूल को माफी नामा, रकम व गांव मिले।