उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में रिश्तेदार की बेटी की शादी में आए तीन लोगों की दर्दनाक मौत से पलिया गांव के सुरेंद्र सिंह के घर की खुशी कुछ घंटे में ही मातम में बदल गई। कौन जानता था कि उनकी बेटी की डोली उठने के कुछ देर बाद ही शादी में आए तीन रिश्तेदारों की अर्थी उठेगी।
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हादसे के बाद मौके पर मौजूद पुलिस व ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला।
सुरेंद्र सिंह ने रविवार को धूमधाम से बेटी की शादी का आयोजन किया। उन्होंने अपने सभी रिश्तेदारों को बुलाया था। शादी में शरीक होने उनके बहनोई दीनानाथ सिंह अपने दो बेटों अतुल और आनंद के साथ आए। ममेरी बहन की शादी में दोनों भाई रातभर बरातियों के आदर-सत्कार में लगे रहे। सुबह बरात विदा होने के बाद कुसम्ही गांव निवासी दीनानाथ अपने दोनों बेटों और दो साढ़ू के साथ कार से घर के लिए निकले।
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रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला।
कार में बेलघाट थाना के जैतीपुर गांव निवासी दीनानाथ के साढ़ू कैलाश सिंह और करहकोल गांव के विश्वनाथ सिंह भी सवार थे। कार दीनानाथ का बड़ा बेटा अतुल चला रहा था। पचरूखा मोड़ पर कार के सामने पशु आने पर गाड़ी अनियंत्रित होकर 15 फिट नीचे पानी में चली गई। पानी में गिरकर कार पूरी तरह डूब गई। गाड़ी के पिछली सीट पर बैठे दीनानाथ का छोटा बेटा आनंद, कैलाश सिंह और विश्वनाथ सिंह का पानी में डूबने से दम घुट गया। वहीं अगली सीट पर बैठे दीनानाथ और अतुल को गांव वालों ने डूबी कार से शीशा तोड़कर बाहर निकाला। मौके पर पहुंची पुलिस की पीआरबी ने तत्परता दिखाकर सभी को अस्पताल पहुंचाया। घटना से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। रिश्तेदारों की चीख से पूरा इलाका गमगीन हो गया। उधर ममेरे भाई की मौत की खबर सुनते ही बहन बिलखते हुए खुद को कोसने लगी।
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रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला।
जान की बाजी लगाकर छह युवकों ने बचाई कार में फंसे दो लोगों की जान
कार सवारों को बचाने के लिए छह युवकों ने अपने जान की बाजी लगा दी। इन युवकों के बहादुरी से दो लोगों की जान बच गई। लोग उनके साहस को सलाम कर रहे हैं। बैदा गांव के रहने वाले रामेश्वर पाल, रणजीत, आजाद चौहान, कोरड़ के रहने वाले सन्नी गिरी और खोपा गांव के रहने वाले रामअशीष और प्रदीप गुप्ता घटना के वक्त उधर से गुजर रहे थे। कार को पानी में डूबता देख इन युवकों ने तत्काल नदी में छलांग लगा दी।
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हादसे के बाद रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला।
सभी लोग तैरकर कार के पास पहुंचे। पानी में डूबी कार का शीशा बंद था। उन लोगों ने तत्काल कार का शीशा तोड़ दिया। अगली सीट पर फंसे दो लोगों को कार से खींचकर बाहर निकाला। कार सवार किसी भी आदमी को तैरना नहीं आ रहा था। अगली सीट से दो लोगों को बाहर निकाल कर किनारे लगाया। तब तक गांव के तमाम लोग पानी में कूद कर अन्य लोगों को निकालने में जुट गए। पिछली सीट पर फंसे तीन लोगों को भी पानी से निकालकर बाहर लाया गया, लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी। इसी दौरान पीआरबी के जवान कृष्णा यादव और होमगार्ड श्रीपति यादव ने सभी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया।
दीनानाथ को नहीं हो रहा जिंदा बचने का विश्वास
हादसे में लाडले बेटे को खो चुके दीनानाथ को खुद के जिंदा बचने का विश्वास नहीं हो रहा है। मौत को करीब से देख चुके वह बदहवास हो चुके हैं। उनकी आंखे मंजर की भयावहता को बयां कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगली सीट पर वह और उनका बड़ा बेटा तड़प रहे थे। तभी कुछ युवक देवदूत बनकर गाड़ी का शीशा तोड़ उन्हें बचा लिए, लेकिन पिछली सीट पर दो साढ़ू और छोटे बेटे की सांस टूट गई। आंख के सामने छोटे बेटे का पार्थिव शरीर देख वह दहाड़ मारकर रोने लगे।