सिनेमा बनाने की जितनी भी कलाएं होती हैं, वे सारी जिस पहली कला से पूनम के चांद तक पहुंचती हैं, वह है लेखन। एक विचार, उस पर लिखी कहानी, कहानी पर बना स्क्रीनप्ले और फिर संवादों के मोतियों से सजकर ये माला जब किसी कलाकार के गले में आती है तो उसकी पहचान कभी एंग्री यंगमैन के रूप में होती है, कभी राहुल, तो कभी प्रेम और कभी रांझणा के रूप में। कालीन भैया, मोगैंबो और गब्बर भी किसी लेखक की ही रची हुई शख्सियतें हैं। इन रचनाकारों का सम्मान आमतौर पर मुंबई में होने वाले फिल्म पुरस्कार समारोहों में कम ही होता है, तो परदे के लिए लिखने वाले ये लेखक बीते पांच साल से अपना खुद का पुरस्कार समारोह करते हैं, अपने बीच के बेहतरीन लेखकों का सम्मान करते हैं और पूरी रात करते हैं जलसा, अपनी मन्नतों की गैलेक्सी के चांद बनकर।