प्रेम रोग
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जिन दिनों ‘प्रेम रोग’ बन रही थी, राजीव कपूर की ड्यूटी लगती थी शूटिंग से पहले सब कुछ ठीक ठाक और चाक चौबंद रखने की ताकि जब राज कपूर सेट पर पहुंचें तो सब कुछ अपनी अपनी जगह पर मिले। लेकिन, पद्मिनी कोल्हापुरे की शूटिंग जब से शुरू हुई, राजीव कपूर अपना काम ही भूल गए। वह दिन भर बस पद्मिनी के आगे पीछे डोला करते और उनसे दो बातें करके ही दिल को तसल्ली दे देते। दो चार दिन तो राज कपूर को समझ नहीं आया कि लड़के को हुआ क्या है, क्यूं वह बहकी बहकी बातें करता है और क्यों सारा काम उसका अस्त व्यस्त रहता है।
फिर किसी ने राज कपूर को बताया कि फिल्म के गाने की छोड़िए, यहां जो भंवरा फूल खिलाने की दिन रात मेहनत कर रहा है, वह उनका छोटा बेटा है। राज कपूर को गुस्सा कम ही आते लोगों ने देखा है लेकिन उस दिन राजीव कपूर की किस्मत ही खराब थी। पद्मिनी के साथ राज कपूर ने जैसे ही राजीव को देखा उन्होंने वहीं उनकी सारी लेफ्ट, राइट, सेंटर कर दी। राज कपूर को उस दिन इतना ताप कि पूछो मत, बोले, कल से ये नहीं सुधरा तो पद्मिनी फिल्म से बाहर हो जाएगी। बहरहाल इसकी नौबत आई नहीं और मामला आसानी से सुलट गया।
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