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Mare Of Easttown Review: रिश्तों की धार पर खरी उतरी ये मर्दानी, केट विंस्लेट की एक और शानदार अदाकारी

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मेर ऑफ ईस्टटाउन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज रिव्यू: मेर ऑफ ईस्टटाउन
लेखक: ब्रैड इंगल्सबी
निर्देशक: क्रैग जोबेल
कलाकार: केट विंस्लेट, जूलियन निकलसन, जीन स्मार्ट आदि।
ओटीटी: डिजनी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग: ***1/2

हिंदी सिनेमा में महिला चरित्रों के जो दायरे बने हुए हैं उनमें अक्सर उलझे रहने वाले दर्शकों के लिए एचबीओ ओरिजनल्स की नई सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ चौंकाने वाली कहानी लग सकती है। महिला सशक्तीकरण के नाम पर खोखली फिल्में बनाने वाले हिंदी सिनेमा के निर्देशकों को तो ये सीरीज जरूर ही देखनी चाहिए। यहां नायिका एक आदर्श स्थापित करने नहीं निकली है। वह अपनी जिंदगी वैसी ही जीने निकली है, जैसी नियति ने उसे बख्शी है या कहें कि जैसी जीने में उसे कोई खास तकलीफ हो नहीं रही। उसे दुनिया भर के काम करने के बाद भी घर आकर खाना पकाने की चिंता नहीं है। वह आज में खुश है। बीते कल से उदास तो है पर आने वाले कल की चिंता वह वक्त आने पर करने में यकीन करती है। ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’, ‘मेड इन हेवन’ और ‘वीरे दी वेडिंग’ बनाने वालों को कुछ ऐसा भी बनाना चाहिए। वेब सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ के भारत आने से पहले इसकी शोहरत पहुंच चुकी थी। अमेरिका में एचबीओ पर इसी साल अप्रैल में रिलीज हुई ये वेब सीरीज अब भारत में डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर पहुची है।

 
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मेर ऑफ ईस्टटाउन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी एक 40 के अरते परते की पुलिस वाली की है जिसके आसपास जिंदगी का हर रंग बिखरा है। कत्ल हो रहा है। अपहरण हो रहे हैं। पब्लिक उसे ताने मार रही है। पति उसे छोड़ चुका है। बेटी खुद मां बन चुकी है। किसी नानी को ऐसे किसी कहानी में मर्दानी बने शायद ही पहले आपने देखा हो। ‘सरदार का ग्रांडसन’ वाली नीना गुप्ता याद हैं ना आपको जिनके किरदार को फिल्म ‘बधाई हो’ में पूरी फिल्म दैहिक सुख भोगने के अपराध बोध में जीना पड़ता है। यहां ऐसा कुछ नहीं है। इन नानी के लिए दैहिक सुख उसकी जिंदगी का हिस्सा भर है जिसे भोगने का उसे अपराध बोध नहीं होता।सात एपिसोड की वेब सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ अपनी नायिका केट विंसलेट की वजह से एक बार में पूरी देख लिए जाने योग्य है। इस वीकेंड वैसे आपके पास ‘द फैमिली मैन 2’ का भी ऑप्शन है। लेकिन, अगर अंग्रेजी सीरीज आपको भाती हैं तो फिर इससे बेहतर कुछ और ओटीटी पर नया उपलब्ध नहीं है।
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मेर ऑफ ईस्टटाउन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
‘सेंस एंड सेंसिबिलिटी’ से लेकर ‘स्टीव जॉब्स’ तक केट विंसलेट की अदाकारी के मुरीद रहे लोगों के लिए वेब सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ इस सीजन की एक और धमाकेदार परफॉर्मेंस है। इस अभिनेत्री में साल दर साल अभिनय का जो एक अलग ओज भरता जा रहा है, वह सिर्फ देख कर ही समझा जा सकता है। केट को अपने प्रौढ़ होने पर गर्व है। वह अपनी उम्र छुपाने का कोई जतन नहीं कर रहीं बल्कि वह ऐसे किरदार पा जा रही हैं, जहां उनकी उम्र उस किरदार को निभाने में मदद ही करती है।

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मेर ऑफ ईस्टटाउन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ प्रेशर कुकर में बनी दाल की बजाय चूल्हे की आंच पर बटलोई में पकती दाल जैसी है। ऊपर कटोरे में भरा रखा पानी अदहन की भाप से खौल रहा है। कहानी पक रही है। सात एपिसोड तक ये कहानी आपको पूरी तरह बांधे रखती है। ब्रैड इंगल्सबी को इस बात का पूरा क्रेडिट मिलना चाहिए कि उन्होंने लगातार एक जैसी होती जा रही सीरीज के बीच कुछ अलग और कुछ नया रचने में कामयाबी पाई। निर्देशक क्रैग जोबल ने इंगल्सबी की कल्पनाओं को कैनवस पर उकेरा और उसमें रंग भरे केट विंस्लेट ने। सीरीज के साथी कलाकारों ने भी किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है और हर किरदार ऐसा अपनापन छोड़ जाता है कि उसके साथ कुछ देर और वक्त बिताने का मन करने लगता है।
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मेर ऑफ ईस्टटाउन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मेर के किरदार में केट विंसलेट अगर यहां चमकती हैं तो इसमें उनके आसपास खड़े किए गए कलाकारों का भी खासा योगदान है। जूलियन निकलसन के किरदार में आपको शुरू से नजर रखनी चाहिए। आप नहीं भी रखेंगे तो भी आखिरी एपिसोड की कहानी आपको उनका पूरा खाका फिर से याद करने पर मजबूर कर देगी। जीन स्मार्ट, केयली स्पैनी की ममता अलग अलग नजरिये से दर्शकों को भावुक करती है। वेब सीरीज ‘मेर ऑफ ईस्टटाउन’ एक खास तरीके का वातावरण बनाकर शूट की गई सीरीज है। सीरीज में बेन रिचर्डसन ने काबिले तारीफ सिनेमैटोग्राफी की है। तकनीशियनों की टोली में सीरीज संगीतकार लेले मार्चिटेली ने भी बढ़िया काम किया है।
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