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बीते हफ्ते बाइस्कोप में खुला इन कालजयी फिल्मों का पिटारा, पढ़ने से चूके लोगों के लिए खास रिमाइंडर

Sun, 21 Jun 2020 05:48 PM IST
प्रतीक्षा राणावत पंकज शुक्ल, मुंबई
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बाइस्कोप - फोटो : Social Media
लॉक डाउन में सिनेप्रेमियों को पुरानी हिंदी फिल्मों के बारे में रोचक जानकारी और इनके अनसुने किस्से बताने के लिए अमर उजाला डिजिटल ने एक नया प्रयोग ‘बाइस्कोप’ शुरू किया। इस दैनिक कॉलम में हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में बातें करते हैं। बाइस्कोप को शुरू हुए 50 दिन से ज्यादा हो चुके हैं और इस दौरान हर रोज आपने हर रोज एक चर्चित फिल्म के किस्से सुने। अब चूंकि अनलॉक वन चल रहा है और रोजमर्रा के काम धंधे भी शुरू हो गए हैं तो पाठकों के संदेश मिले हैं कि बाइस्कोप वह रोज नहीं पढ़ पा रहे हैं। ऐसे पाठकों के लिए हम लेकर आए हैं बाइस्कोप का ये वीकली रिमाइंडर। इसमें आपको बीते हफ्ते में प्रकाशित सारे बाइस्कोप एक ही जगह मिल जाएंगे।
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मोहब्बत - फोटो : Social Media
मोहब्बत (14 जून 1985)
क्या आपको पता है कि मशहूर निर्देशक मणिरत्नम की बतौर निर्देशक पहली फिल्म का हीरो कौन है? क्या आपको पता है कि तमिल लेखक, निर्देशक और अभिनेता के भाग्यराज की लिखी फिल्मों की हिंदी रीमेक में सबसे ज्यादा किस अभिनेता ने काम किया है? और, क्या आपको पता है कि उस हीरो का नाम जो अपनी गर्लफ्रेंड को अपनी एक फिल्म दिखाने ले गया हो और फिल्म में उसका सीन ही काट दिया गया हो, परदे पर कुछ दिखा हो तो बस उनका पांव? नहीं पहचाना? ये हैं हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय मुन्ना, लखन और प्रेम प्रताप पटियालावाले यानी कि अनिल कपूर। अनिल कपूर से अब भी आप मिलो तो यही लगता है कि आपके छोटे भाई हैं। शेखर कपूर भले मिस्टर इंडिया के बाद टाइम मशीन न बना पाए हों, लेकिन अनिल कपूर के लिए समय रुका हुआ है। और, इसी रुके हुए समय में हम आज आपको ले चलते हैं 35 साल पीछे जब अनिल कपूर और विजेता पंडित की फिल्म मोहब्बत रिलीज हुई थी। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: बापू व अनिल कपूर की जोड़ी का अमर संदेश, 'सांसों से नहीं, कदमों से नहीं, मोहब्बत से....'
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gadar film - फोटो : file photo
गदर एक प्रेम कथा (15 जून 2001)
19 साल पहले न मल्टीस्क्रीन्स वाले सिनेमाघर होते थे और न ही इतने शोज कि जितने लोग भी किसी फिल्म को पहले दिन ही देखना चाहें तो सबको टिकट मिल ही जाए। तो तय हुआ कि गदर एक प्रेमकथा का पहला शो सुबह छह बजे से शुरू होगा। पूरे देश में उस दिन उत्सव सा माहौल था। सनी देओल के दीवाने ढोल ताशे लेकर ये फिल्म देखने पहुंचे और साथ में ही लोगों को लगान भी देखनी थी। मैंने ये दोनों फिल्में एक ही दिन नई दिल्ली में देखीं। पहले शीला थिएटर में लगान देखी और फिर वहां से भागकर पहुंचे कनॉट प्लेस के प्लाजा सिनेमाघर, जहां हमारी सीटें बुक होने के बावजूद सिनेमाहॉल के भीतर घुसने तक को जगह नहीं बची थी। जैसे तैसे धक्का मुक्की करते हॉल के भीतर पहुंचे तो वहां सिर्फ भीड दिख रही थी, जितने लोग सीटों पर बैठे थे, उतनी ही पब्लिक सिनेमाघर के भीतर खड़े होकर सिनेमा देख रही थी। खड़े होकर फिल्म देखने वाले इन दर्शकों की गिनती तो नहीं ही हुई होगी, लेकिन तब भी फिल्म गदर एक प्रेम कथा ने भारत में सबसे ज्यादा टिकटें बेचने का रिकॉर्ड बना दिया था। 15 जून 2001 को रिलीज हुई गदर एक प्रेम कथा ही हमारे आज के इस बाइस्कोप की फिल्म है। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: इस फौजी की असल प्रेम कहानी पर बनी गदर एक प्रेमकथा, बनाया ये अनोखा रिकॉर्ड

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दाना पानी - फोटो : Social Media
दाना पानी (16 जून 1989)
दाना पानी की कहानी शहरों मे बड़े बड़े सपनों के टूटने की कहानी है। खून के रिश्तों के टूटने की कहानी है और अपने सामने अपनों के बिखरते देखने की कहानी है। कुत्ती सेठ और सावित्री बाई के कत्ल के इल्जाम में जेल में अपनी फांसी का इंतजार कर रहे टैक्सी ड्राइवर सत्यप्रकाश त्रिपाठी की ये कहानी है। कहानी है कि कैसे बेरोजगारी भी भाइयों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर सकती है। एक कामयाब भाई जब एक बेरोजगार और गरीब भाई को दुत्कारता है तो हालात कैसे बिगड़ते हैं, इसी कही कहानी कहती है देवेन वर्मा की फिल्म दाना पानी। दाना पानी को अपनी रिलीज के समय ज्यादा सिनेमाघर नहीं मिल सके थे। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: बर्थडे पर रिलीज हुई मिथुन की इस फिल्म में दिखी पलायन की समस्या, बनी अपने समय का दस्तावेज
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आतिश - फोटो : Social Media
आतिश (17 जून 1994)
आतिश के बारे में बातें करते हुए संजय गुप्ता कहते हैं, “कास्टिंग के लिहाज से ये सबसे आसान फिल्म थी। मैं ज्यादातर दोस्तों के साथ ही काम कर रहा था। और शुक्रिया संजू का कि उनकी वजह से ये फिल्म मैं बना सका।” संजय दत्त के साथ कांटे बनाने के बाद संजय गुप्ता के जीवन में संकट आया। इसी इंटरव्यू में वह खुद कहते हैं, “कांटे के बाद तो पीछे देखने का सवाल ही नहीं था लेकिन फिर शूट आउट ऐट वडाला से ठीक पहले मैं चार साल कुछ नहीं कर सका। फिल्म इंडस्ट्री के 90 फीसदी लोग मेरे साथ काम नहीं करना चाहते थे। संजू से मनमुटाव होने के बाद सबको बोल दिया गया कि इसके साथ काम मत करो।” हालांकि संजय गुप्ता यहां ये भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसा कोई संदेश संजय दत्त की तरफ से नही गया बल्कि उनके आसपास रहने वालों ने ही ये माहौल बना दिया था। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: संजू बाबा के डर से इस डायरेक्टर का हुआ था सामूहिक बहिष्कार, खेमेबाजी पर सबसे बड़ा खुलासा
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हम दिल दे चुके सनम - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
हम दिल दे चुके सनम (18 जून, 1999)
ऐश्वर्या राय बच्चन को तब आमिर खान की फिल्म राजा हिंदुस्तानी ऑफर हुई थी, वह ये फिल्म तारीखों के चक्कर में कर नहीं पाईं तो इसकी स्पेशल स्क्रीनिंग पर वह इसलिए चली गईं कि कहीं फिल्म से जुड़े लोग बुरा न मान जाएं। वहीं ऐश्वर्या की पहली मुलाकात संजय लीला भंसाली से हुई। मिस वर्ल्ड वह बन चुकी थीं। आत्मविश्वास उनमें भरपूर था ही। जैसे ही वह भंसाली से मुखातिब हुईं, उन्होंने अपना दाहिना हाथ बढ़ाया और जैसे ही भंसाली ने उनका हाथ लपका, वह बोलीं, “हाय! आई एम ऐश्वर्या राय एंड आइ लाइक्ड योर मूवी खामोशी द म्यूजिकल।” ऐश्वर्या की आवाज भंसाली के कानों से जब टकराई तो उन्हें भान हुआ कि वह लगातार उनकी आंखें देखे जा रहे थे। बड़ी बड़ी सी हिरनी जैसी आंखें। रंग किसी शांत झील सा और उन आंखों की चमक ने भंसाली का मन मोह लिया। उनके मन में आवाज आई, यही तो मेरी नंदिनी है। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: 'हाय! आई एम ऐश्वर्या राय' सुनकर होश खो बैठे थे संजय लीला भंसाली, ऐसे मिली थी नंदिनी
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हीर रांझा - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
हीर रांझा (19 जून 1970)
नौटंकी उन दिनों हिंदुस्तान की हिंदी पट्टी में मनोरंजन का एक बड़ा साधन हुआ करती थी और सिनेमा देखने पहुंचे को यूं लगा कि रात के अंधेरे में पेट्रोमैक्स की रोशनी में चलने वाले खेल ही किसी ने अंधेरे सिनेमाघर के रौशन परदे पर पूरी हमदर्दी के साथ उतार दिया है। अगर आपने चेतन आनंद की 1946 में रिलीज हुई फिल्म नीचा नगर या फिर 1964 में रिलीज हुई फिल्म हक़ीक़त देखी हैं तो आपको फिल्म हीर रांझा का संदर्भ और प्रसंग दोनों आसानी से समझ आ जाएगा। लाहौर में जन्मे चेतन आनंद ने फिल्म हीर रांझा से अपनी वतन वापसी की ऐसी राह बनाई जिस पर आगे चलकर यश चोपड़ा जैसे दिग्गज फिल्मकार भी चले। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: इस फिल्म से शुरू हुआ प्रिया राजवंश और चेतन आनंद की मोहब्बत का अफसाना, हर गाना बेमिसाल
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कुरबानी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कुर्बानी (20 जून, 1980)
फिरोज खान ने बतौर डायरेक्टर पहली ही फिल्म अपराध से एक ऐसा बेंचमार्क हिंदी सिनेमा में सेट किया कि लोग बस देखते रह गए। फॉर्मूला कार रेसिंग की जर्मनी में हुई शूटिंग दिखाने के बाद फिरोज खान ने अगली फिल्म धर्मात्मा की शूटिंग अफगानिस्तान जाकर की और सिनेमा देखने वालों में हल्ला मचा दिया। और, बतौर निर्देशक अपनी तीसरी ही फिल्म कुर्बानी में अपने सिनेमा के एक अलग स्टाइल का संसार रच दिया। साल 1980 में रिलीज हुई कुर्बानी हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है। पढ़िए फिल्म का पूरा बाइस्कोप नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके।

बाइस्कोप: जीनत अमान को बिकिनी पहनाकर भी यू सर्टिफिकेट ले आए फिरोज खान, कमाई का बना सबसे बड़ा रिकॉर्ड
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