गीतकारों की बात हो या कवियों की अभिनेताओं की बात हो या राजनेताओं की उत्तर प्रदेश हर मायने में खास है। इस प्रदेश ने फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे चमकते सितारे दिए हैं कि शायद मरने के बाद भी उनकी चमक कभी फीकी न पड़े। इसी प्रदेश का एक छोटा सा जिला है बदायूं। ये जिला तीन चीजों पीर, पेड़े और कवियों के लिए मशहूर है। पीर, पेड़ों से इतर अगर हम कवियों की बात कर लें तो इस जिले ने दिलावर फिगार, अदा जाफरी, फानी बदायूंनी, इस्मत चुगताई और शकील बदायूंनी जैसे नामी शायर पैदा किए हैं। लेकिन आज हम इन सभी कवियों की नहीं बल्कि उस एक कवि की बात करने जा रहे हैं, जिसने हिंदी साहित्य के साथ-साथ हिंदी सिनेमा को भी अपने शानदार नगमों से सजाया।