kamal amrohi
जब ये बात कमाल अमरोही को पता चली तो भागे भागे एडिटर के पास पहुंचे और उनके फिल्म में सीन दोबारा जोड़ने को कहा। जब एडिटर ने इसकी वजह पूछी तो कमाल अमरोही साहब ने कहा कि इस सीन में जो लड़की छत से साहिबजान की डोली जाते हुए देख रही है, उसके मन में भी यह सपना है कि एक दिन उसकी भी बारात आएगी और उसे भी कोई इस तरह डोली में बैठाकर ले जाएगा। दरअसल, यही लड़की असली पाकीजा है। इस बात को सुनकर एडिटर ने फ़िल्म में सीन को जोड़ तो दिया मगर कमाल अमरोही साहब से पूछा कि उन्हें लगता है की कोई ये समझ पाएगा कि छत वाली लड़की की असल में पाकीजा है? इसके जवाब में कमाल साहब ने कहा कि अगर एक आदमी भी ये समझने में कामयाब रहा तो उनका फिल्म बनाना सफल हो जाएगा।
इस घटना के तकरीबन एक साल बाद एक आदमी ने कमाल अमरोही साहब को खत लिखकर यह बताया कि उसे छत पर खड़ी लड़की की तस्वीर चाहिए, जिसे देखकर उसे महसूस हुआ की वही असली पाकीजा है। कमाल साहब इस बात से बेहद खुश हुए और उन्होंने एडिटर डी.एन.पाई को बुलाया कहा की ये पढ़ो,ये वो आदमी है जिसने मेरी फिल्म देखी है।