अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्मों में शुमार फिल्म ‘याराना’ की रिलीज के 40 साल पूरे हो रहे हैं। अमिताभ बच्चन ने आधी रात को इसे लेकर ट्वीट भी किया। हिंदी सिनेमा में ये फिल्म एक ऐसा प्रयोग है जिसे दोहराने की हिम्मत इसके बाद से आज तक कोई नहीं कर पाया। ये वह समय था जब अमिताभ बच्चन अपने नाम के मुताबिक शोहरत के आसमान पर सूरज की तरह चमक रहे थे। उनके दफ्तर में निर्माताओं की लाइन लगी रहती थी किसी तरह उनको अपनी फिल्म में ले लेने के लिए। अमिताभ बच्चन की दरियादिली के किस्से भी बहुत सारे हैं। इनमें से एक किस्सा फिल्म ‘याराना’ का भी है। निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा ने अपने सहायक निर्देशक राकेश कुमार को मौका दिया फिल्म ‘खून पसीना’ में निर्देशक बनने का। राकेश ने अमिताभ बच्चन के साथ इसके अलावा ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘दो और दो पांच’ और ‘याराना’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। राकेश कुमार का फिल्मी करियर के बी लाल और चांद श्रीवास्तव जैसे निर्देशकों के सहायक के रूप में शुरू हुआ।
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फिल्म याराना
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमजद खान के करियर का टर्निंग प्वाइंट
ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में बिजनौर, उत्तर प्रदेश से पहुंचे 29 साल के एक लड़के ने हंगामा मचा रखा था। इसकी पहली ही फिल्म थी शशि कपूर, अमिता और जॉनी वॉकर के साथ बनी ‘हसीना मान जाएगी’। दूसरी फिल्म संजय खान और मुमताज के साथ ‘मेला’ भी सुपरहिट रही और तीसरी फिल्म ‘समाधि’ में धर्मेंद्र, आशा पारेख और जया भादुड़ी को लेकर प्रकाश मेहरा नाम के इस युवा निर्देशक ने कामयाबी की हैट्रिक बना दी। ‘समाधि’ के बाद प्रकाश मेहरा ने सुनील दत्त और राखी को लेकर जो फिल्म ‘आन बान’ बनाई, उसमें राकेश कुमार का काम बतौर सहायक चर्चा में आया। बाद मे राकेश ने प्रकाश मेहरा की तमाम फिल्मों में उनके सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। राकेश कुमार की दोस्ती इसी दौरान अमिताभ बच्चन से काफी अच्छी हो गई। ‘याराना’ से पहले दोनों तीन फिल्में साथ में कर चुके थे और जब ‘याराना’ बनाने के लिए इसके निर्माता एम ए नाडियाडवाला ने उनके संपर्क किया तो राकेश के जेहन में पहला नाम अमिताभ बच्चन का ही आया। अमिताभ बच्चन की तब तक ‘शोले’ समेत तमाम फिल्मों में अमजद खान बहुत ही क्रूर और खूंखार विलेन का रोल कर चुके थे। राकेश कुमार ने ‘याराना’ में अमजद खान को पहली बार एक दोस्त के रूप में और भले इंसान के रूप में पेश करने का फैसला किया।
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अमिताभ की तारीखों पर अटका मामला
फिल्म ‘याराना’ की राइटिंग टीम अपना काम शुरू कर चुकी थी। राजेश खन्ना की फिल्म ‘आविष्कार’ से शुरू करके अनिल कपूर की फिल्म ‘बेटा’ तक करीब 20 फिल्में लिखने वाले राइटर ज्ञानदेव अग्निहोत्री ने फिल्म ‘याराना’ की कहानी लिखी। अभिनेता अपूर्व अग्निहोत्री इनके ही बेटे हैं। राकेश कुमार की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘खून पसीना’ में उनके मुख्य सहायक रहे विजय कौल तब तक प्रकाश मेहरा की हिट फिल्मों ‘हेराफेरी’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की पटकथा लिख चुके थे। राकेश ने अपने इस दोस्त को फिल्म ‘याराना’ में फिर साथ लिया। सबने मिलकर एक ठीक ठाक सी कहानी और पटकथा लिख ली। कादर खान भी तब तक अमिताभ बच्चन को अमित कहकर ही बुलाते थे और अमिताभ बच्चन की फिल्मों में संवाद लेखक के तौर पर नियमित काम करते रहते थे। फिल्म ‘याराना’ में एक खास किरदार निभाने के साथ साथ कादर खान ने ‘याराना’ के संवाद भी लिखे। अब जब कहानी वगैरह सब तैयार हो गई और हीरोइन के तौर पर नीतू सिह भी आ गई तो मामला अमिताभ बच्चन की तारीखों पर अटक गया।
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घंटा घंटा जोड़कर यूं बनी फिल्म
राकेश कुमार की अमिताभ बच्चन से दोस्ती इतनी गहरी थी कि वह उनकी तमाम निजी चीजें भी देख लिया करते थे। ऐसे में ही एक दिन राकेश कुमार उनके दफ्तर में बैठे बैठे डेट डायरी देखने लगे। उन्होंने नोट किया अमिताभ शिफ्ट में काम कर रहे हैं और लगातार काम कर रहे हैं। फिल्मों की शूटिंग की पहली शिफ्ट तब भी और अब भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सुबह सात बजे शुरू होती है। तो राकेश कुमार ने अमिताभ से रीक्वेस्ट की कि अगर वह अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए तैयार होकर निकलने के बाद अपनी लोकेशन पर पहुंचने से पहले एक एक घंटा भी रोज उनको देते रहें तो वह फिल्म बना सकते हैं। बीच में जो ब्रेक अमिताभ को मिलते थे, उनका इस्तेमाल भी फिल्म याराना को बनाने में किया गया। तारीखों के बीच तारीख निकालने का ये प्रयोग हिंदी सिनेमा में अपनी तरह का अनोखा बताया जाता है।
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मोबाइल से पहले के दौर की मोहब्बत
फिल्म ‘याराना’ की हीरोइन नीतू सिंह का किस्सा भी इस फिल्म का कम अजीब नहीं है। फिल्म ‘याराना’ का मुहूर्त 1 जुलाई 1977 को हुआ और फिल्म रिलीज हुई 23 अक्टूबर 1981 को। ये उन दिनों की बात है जब ऋषि कपूर और नीतू सिंह का रोमांस अपनी बुलंदियों पर था और दोनों खुल्लम खुल्ला प्यार भी कर रहे थे। फिल्म ‘याराना’ की शूटिंग के दौरान नीतू सिंह को फिल्म के एक गाने की शूटिंग के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) जाना पड़ा। वहां के नेताजी सुभाष इनडोर स्टेडियम में फिल्म के गाने की शूटिंग थी और नीतू सिंह को ऋषि कपूर की बहुत याद आ रही थी। फोन मिल नहीं रहा था और उनका काम में मन नहीं लग रहा था। अमिताभ बच्चन ने ये देखा तो उन्होंने नीतू के रोने की वजह पूछी और मामला पता चलने पर उन्होंने तुरंत नीतू को अगली ही फ्लाइट से बंबई (अब मुंबई) भेजने का इंतजाम कर दिया और कहा कि वह बिना हीरोइन के ही ये गाना मैनेज कर लेंगे।
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बल्बों की लड़ी से बनी ड्रेस का आइडिया
फिल्म ‘याराना’ के गीत और इसका संगीत अपने दिनों में सुपर हिट रहा। फिल्म के क्रेडिट्स में बतौर गायक सिर्फ मोहम्मद रफी और किशोर कुमार का ही नाम है। किसी हिंदी फिल्म के क्रेडिट्स में किसी महिला गायक का नाम न होना भी किसी हैरानी से कम नहीं है। फिल्म के जो गाने अब उपलब्ध हैं, उनमें कहीं भी फिल्म का पहला गाना जो फिल्म के मुख्य किरदार किशन और बिशन बचपन में गाते हैं, दिखता नहीं है। ‘छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा’ के अलावा फिल्म में ‘भोले ओ भोले’, ‘तेरे जैसा यार कहां’ और ‘सारा जमाना हसीनों का दीवाना’ सुपर डुपर हिट गाने रहे हैं। ‘सारा जमाना हसीनों का दीवाना’ में अमिताभ बच्चन की ड्रेस में बल्बों की लड़ियां पिरोई गईं औऱ नाचते समय इनका स्विच अमिताभ बच्चन के हाथ में रहता था। इस ड्रेस के डिजाइन का आइडिया संभवत: अमिताभ बच्चन को 1979 में रिलीज हुई फिल्म ‘द इलेक्ट्रिक हॉर्समैन’ से आया। इस फिल्म में रॉबर्ट रेडफोर्ड ने ऐसी ही एक ड्रेस पहनी है।
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कहानी अमीरी और गरीबी की दोस्ती की
फिल्म ‘याराना’ कहानी है बचपन के दोस्तों की। एक गरीब किशन और दूसरा अमीर बिशन। दोनों की दोस्ती बड़े होने पर भी जारी रहती है। बिशन का मामा और उसका ममेरा भाई उसकी पूरी दौलत लूट ले जाते हैं। बिशन चाहता है कि किशन बहुत बड़ा गायक बने और इसके लिए वह अपनी कोठी और अपना पानी का जहाज गिरवी रखकर उसका शो कराता है। हालात बदलते हैं। बिशन पागल हो जाता है। कहानी के खलनायक उसे तबाह कर पाएं, उससे पहले किशन किसी तरह बिशन के पास पागलखाने पहुंचने में कामयाब हो जाता है। किशन अब कैसे बिशन को बचाता है और उसका सपना भी पूरा करता है, यही फिल्म ‘याराना’ की कहानी है।
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अमिताभ बच्चन को याद आया कोलकाता
फिल्म ‘याराना’ की रिलीज के 40 साल पूरे होने पर अमिताभ बच्चन ने आधी रात को जो ट्वीट किया उसमें उन्होंने फिल्म की शूटिंग लोकेशन का खास जिक्र किया है। अमिताभ बच्चन को कोलकाता (तब कलकत्ता) से काफी लगाव रहा है। फिल्म ‘याराना’ की शूटिंग वहां के नेताजी सुभाष इंडोर स्टेडियम में असली भीड़ के साथ होनी थी और शूटिंग के लिए वहां पहुंची पब्लिक काबू से बाहर हो गई। अमिताभ और नीतू किसी तरह वहां से निकले तो रास्ते में उनकी कार खराब हो गई। हजारों की भीड़ ने कार को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस भी आई लेकिन दोनो का कार से निकालकर पुलिस वैन ले जाना भी मुमकिन नहीं था। फिर पब्लिक को समझ आया कि इनकी तो कार खराब है। अमिताभ बच्चन के मुताबिक फिर इन लोगों ने पूरी कार ही उठा ली और उसे होटल तक ऐसे उठाए उठाए ही ले आए। ऐसा दीवाना था जमाना, बीती सदी के इस सुपरस्टार का...
चलते चलते...
फिल्म ‘याराना’ साल 1981 में कमाई करने वाली टॉप 10 फिल्मों में शामिल रही। उस साल अमिताभ बच्चन की चार फिल्में ‘नसीब’, ‘लावारिस’, ‘कालिया’ और ‘याराना’ इन टॉप 10 फिल्मों में शामिल रहीं। फिल्म ‘याराना’ के शुरू होने और रिलीज होने के बीच में ही नीतू सिंह अपने बरसों के प्रेमी ऋषि कपूर संग शादी कर नीतू कपूर हो गईं। इन दोनों के रिसेप्शन में रेखा का मांग में सिंदूर भरकर पहुंचना तब सुर्खियां बटोर ले गया था। रेखा ने ही फिल्म ‘याराना’ के तमाम सीन्स में नीतू सिंह की डबिंग भी की है। फिल्म ‘याराना’ के बाद इसके निर्देशक राकेश कुमार ने अमिताभ बच्चन और पद्मिनी कोल्हापुरे को लेकर एक फिल्म ‘चार्ली’ शुरू की थी, लेकिन फिल्म ‘कुली’ के दौरान हुए हादसे के चलते ये फिल्म बंद हो गई। बाद में अमिताभ बच्चन ने राकेश कुमार की फिल्म ‘कौन जीता कौन हारा’ में एक स्पेशल अपीयरेंस दिया।
(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)