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Bhopal Gas Tragedy: वो रात जब नींद से कभी नहीं जागे 16000 लोग, जिस फैक्ट्री से गैस लीक हुई आज ऐसी है उसकी हालत

Sat, 02 Dec 2023 06:46 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Bhopal Gas Tragedy: 02 और 03 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन से 45 टन मिथाइल आइसोसाइनेट कीटनाशक लीक हो गई थी। इसके कारण 16,000 लोगों की मौत हो गई थी।
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भोपाल गैस त्रासदी - फोटो : social media
Bhopal Gas Tragedy: 02 दिसंबर से लेकर 03 दिसंबर, 1984 को हुई भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है। इस दुर्घटना की भीषणता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसमें दो ही रातों में करीब 16,000 लोगों की जान चली गई। यह दुर्घटना भोपाल स्थित औद्योगिक संयंत्र अमेरिकी फर्म यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन की भारतीय सहायक कंपनी से लगभग 45 टन खतरनाक मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस लीक होने के कारण हुई थी। जहरीली गैस के संपर्क में आए अन्य लोग जो बच गए थे, उन्हें सांस की समस्या, आंखों में जलन या अंधापन, और अन्य विकृति जैसी बीमारियां हो गई। आगे तस्वीरों में देखिए आज उस फैक्ट्री की क्या हालत है।
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Bhopal Gas Tragedy - फोटो : Social Media
मिथाइल आइसोसाइनेट एक कीटनाशक बनाने वाली गैस है। जब जांच हुई तो पता चला कि संयंत्र को संचालित करने के लिए कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या भी नहीं थी और उसमें कई सुरक्षा प्रक्रियाओं की कमी भी मिली। इस लापरवाही के कारण हुई त्रासदी का असर लोगों की अगली पीढ़ियों तक ने भुगता।
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Bhopal Gas Tragedy - फोटो : Social Media
मरने वालों की गिनती 16,000 से भी अधिक थी। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में केवल 3000 लोगों के मारे जाने की बात कही गई।

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Bhopal Gas Tragedy - फोटो : Social Media
हादसे के बाद यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरशन ने 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर का मुआवजा दिया। हालांकि, पीडितों ने ज्यादा मुआवजे की मांग के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कुछ दोषियों को सजा हो सकी।
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Bhopal Gas Tragedy - फोटो : Social Media
मामले का मुख्य आरोपी UCC का अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन था। सबसे दुखद बात यह है कि उसे कभी सजा नहीं हो पाई। हालांकि, भोपाल की एक अदालत ने कंपनी के 7 अधिकारियों को इस मामले में 2 साल की सजा सुनाई।
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Bhopal Gas Tragedy - फोटो : Social Media
01 फरवरी 1992 को भोपाल कोर्ट ने एंडरसन को फरार घोषित कर दिया और उसके खिलाफ 1992 और 2009 में दो बार गैर-जमानती वारंट भी जारी किया, मगर उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। सितंबर, 2014 में एंडरसन की स्वाभाविक मौत हो गई और इस तरह उसे कभी इस मामले में सजा नहीं हो सकी।
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