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मुझे देखकर वो सड़क पर ही गंदी हरकत करने लगा और मैं...

Wed, 17 Jun 2015 07:34 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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किसी भी लड़की के लिए नोएड़ा में अकेले सफर करना सुरक्षित नहीं है। इसलिए लड़की के दोस्त ने उसे और उसकी फ्रैंड्स को ऑफिस से पिक करना उचित समझा और वे नोएडा के लिए निकल पड़े।
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चूंकि दोस्त के व्यक्तित्व का मिजाज बातूनी और वैचारिक था। यूं कहें कि चिंतन करने की विशेषता के कारण रास्ते में वो लड़की और उसके दोस्तों को शहर में हुई उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में बता रहा था।
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उनमें से कुछ भयानक, कुछ अविश्वसनीय और कुछ ऐसी घटनाएं थी, जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल था। ये सब किस्से इतने डरावने थे कि इन्हें सुनकर लड़की ने कभी भी नोएडा में अकेले सफर न करने का निर्णय लिया।

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हालांकि इन सबके बीच लड़की के लिए अपने पुरूष मित्र के साथ कार में सुरक्षित महसूस करना राहत और विश्वास देने वाला था। बातचीत करते हुए वे उस जगह पहुंच गए जहां उनकी जन्मदिन मनाने की योजना थी।
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जब लड़के के सब दोस्त आ चुके थे तो उन्होंने केक काटा और सब इंजॉय कर रहे थे। इसी दौरान लड़की को उसकी दोस्त का फोन आया और वह बात करने के लिए बालकनी में चली गई।
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जब वह बालकनी में फोन पर बात कर रही थी, तभी लड़की को सड़क के दूसरी ओर एक व्यक्ति दिखाई दिया। लड़की को देखकर उसने तेजी से सड़क पार की।
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लड़की की तरफ मूंह घूमाने के बाद वह उसी इमारत के नीचे रूक गया जिसकी बालकनी में लड़की खड़ी थी। चूंकि ये एक सुरक्षित सोसाइटी थी इसलिए लड़की ने उस व्यक्ति की चिंता नहीं की और फोन पर बात करती रही।

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वहां अंधेरा होने के बावजूद भी लड़की को आसपास की चीजें साफ नजर आ रही थी। लड़की ने उस व्यक्ति को भूलाकर बालकनी से फोन पर बात करना जारी रखा।

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ये बेहद घृणित और अत्यंत घिनौना था। लड़की तेजी से अंदर गई। वह पूरी तरह विचलित हो चुकी थी। लड़की फोन पर अपनी दोस्त को बाद में बात करने के लिए बोलते हुए रूक गई।

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कुछ देर बाद वह ये सब सोचते हुए उठी कि उसने जो देखा, क्या वह सच था? लड़की को यकीन हुआ कि जो उसने देखा वह उसकी कल्पना कर चुकी है। इसलिए वह फिर झांकने लगी और वह व्यक्ति अभी भी वहीं था। वहां अंधेरा था लेकिन वो वहां से नहीं हिला। लड़की पूरे कपड़ों में थी फिर भी वो वहीं खड़ा रहा। लड़की उस व्यक्ति को जानती नहीं थी लेकिन फिर भी वो वहीं खड़ा था।

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ये करीब रात 12 बजे के बाद का समय रहा होगा। लड़की सब कुछ छिपाते हुए तेजी से वापस उस कमरे में पहुंची, जहां उसके सब दोस्त मौजूद थे। उस कमरे में चार आदमी थे। लेकिन ये आदमी उससे एकदम अलग थे। उन्होंने निश्चित किया कि वह लड़की सुरक्षित है या नहीं।
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वे खुद असुविधाजनक तरीके से फर्श पर सोए ताकि घर में मौजूद सब लड़कियां बिस्तर पर सो सकें। इतना ही नहीं उन्होंने उन लड़कियों को अकेले सुनसान सड़क पर भी नहीं निकलने दिया। क्योंकि उन्हें पता था कि ये कितना असुरक्षित है? उस दिन लड़की को अनुभव हुआ कि ये दो तरह के पुरूषों के बीच एक बड़ा अंतर है। एक वो जिनके बारे में हम अखबारों में पढ़ते हैं और दूसरे वो जिन्हें देखकर उम्मीद जागती है।
 
साभार- इशा जालान, लेखक, स्कूपव्हूपडॉटकॉम
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