बीजेपी नेता और पूर्व गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर सात साल पहले अपनी शिष्या से रेप के आरोप लग चुके हैं। नवंबर 2011 में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में स्वामी चिन्मयानंद की एक शिष्या ने उनके खिलाफ कथित बलात्कार एवं हत्या के प्रयास के आरोप को प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तब हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। उसके बाद यह केस पेंडिंग था।
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स्वामी चिन्मयानन्द ने आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया था। प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 2001 से वह राजनीतिक और आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित करने के लिए स्वामी चिन्मयानंद के दिल्ली आवास पर रह रही थी और उनके साथ अनेक स्थानों की यात्रा कर चुकी है।
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शिष्या ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2005 में स्वामी चिन्मयानन्द के निर्देश पर उन्हें मुमुक्षक आश्रम लाया गया, जहां उन्होंने नशीला पदार्थ खिलाकर उसका यौन शोषण किया और इसका वीडियो बना लिया, जिसके बल पर उसे ब्लैकमेल किया और दो बार उसे गर्भपात भी कराना पड़ा। भाजपा की सरकार बनने के बाद चिन्मयानंद के खिलाफ दर्ज मामले को राज्य सरकार ने 321 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत केस वापसी को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
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सरकार के इस कदम पर पीड़ित पक्ष की ओर से आपत्ति की गई। पीड़ित पक्ष की आपत्ति पर सुनवाई के बाद सीजेएम ने चिन्मयानंद के खिलाफ 24 मई 2018 को पांच हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए उनको 12 जुलाई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। चिन्मयानंद कोर्ट में पेश नहीं हुए। उन्होंने सीजेएम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। सीजेएम ने सुनवाई के लिए 12 सितंबर तय कर दी थी।
बुधवार को सीजेएम शिखा प्रधान की कोर्ट में चिन्मयानंद के वकील ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल की। हाईकोर्ट ने शिष्या से दुष्कर्म मामले में चिन्मयानंद के खिलाफ निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। बुधवार को मामले में सुनवाई के बाद सीजेएम शिखा प्रधान ने अगली जारी 22 नवंबर तय कर दी है।