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भाजपा में शामिल हुए पूर्व सपा सांसद सुरेंद्र नागर, निर्दलीय एमएलसी से राज्यसभा पहुंचने तक पूरा सफर

Sat, 10 Aug 2019 02:41 PM IST
पूजा त्रिपाठी आशीष शुक्ला/न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/बुलंदशहर
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सुरेंद्र सिंह नागर भाजपा में शामिल - फोटो : ani
समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर और संजय सेठ शनिवार दोपहर को भाजपा में शामिल हो गए। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटने से पहले सुरेंद्र नागर ने 2 अगस्त को सपा से इस्तीफा दे दिया था। कयास तो ये भी है कि उनके इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव में भाजपा उन्हें दोबारा राज्यसभा ही भेजेगी। आगे की स्लाइड्स में जानिए कैसे उन्होंने एक निर्दलीय प्रत्याशी से राज्यसभा सांसद तक का सफर तय किया और अपना एक अलग मुकाम बनाया....
 

 
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- फोटो : अमर उजाला

1998 में निर्दलीय एमएलसी बनने के बाद पीछे नहीं मुड़े ‘सुरेंद्र’
 

बुलंदशहर में नब्बे के दशक में राजनीति का ककहरा पढ़ने वाले सुरेंद्र नागर अब प्रदेश और देश की राजनीति में अपनी अहम भूमिका रखते हैं। निर्दलीय एमएलसी बन कर जनपद की राजनीति में ऊहापोह मचाने वाले नागर उसके बाद जिस भी पार्टी में रहे उनका अपना दबदबा रहा है। राज्यसभा से सांसद के इस्तीफा देने के बाद जनपद के सपा नेताओं में रोष नजर आ रहा है।

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surendra singh nagar - फोटो : सोशल मीडिया
जनपद के गुलावठी कस्बे में जन्मे सुरेंद्र नागर ने नब्बे के दशक में राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी। उस दौरान भी वह युवा गुर्जर नेता के रुप में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उन्होंने वर्ष 1998 में निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में एमएलसी की कुर्सी हासिल कर ली थी। इसके बाद जनपद की राजनीति में उनकी अलग साख जमने लगी थी। कुछ वर्षों बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

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surendra singh nagar - फोटो : ट्विटर
साथ ही 2009 में 15वीं लोकसभा में गौतमबुद्धनगर सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में धुरंधरों को मात देकर सुरेंद्र सिंह नागर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। समाजवादी पार्टी ने सुरेंद्र नागर को वर्ष 2016 में राज्यसभा भेजा था। जिसके बाद से वह राज्यसभा में सपा का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
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surendra singh nagar - फोटो : ट्विटर
वहीं, अब उनके समर्थकों की चर्चाओं पर ध्यान दें तो उन्हें उम्मीद है कि नागर एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर कोई ठोस कदम ही उठाएंगे। हालांकि, उनके समर्थकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन, स्पष्ट रुप से कोई भी कु छ बोलने से कतरा रहा है। सुरेंद्र नागर से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद बंद मिला। हालांकि, इनके छोटे भाई नरेंद्र नागर ने बताया कि अभी तक उनके भाई भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। 

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surendra singh nagar - फोटो : सोशल मीडिया

भाजपा का थामने से टूट सकती है सपा-बसपा की रीढ़

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, बागपत, गाजियाबाद आदि सीटों पर गुर्जर बिरादरी का अच्छा प्रभाव है। सुरेंद्र नागर के सपा में होने के बाद भी भाजपा यहां सीट तो पिछले दो बार से जीत रही थी, लेकिन भाजपा को पूरी ताकत झोंकनी पड़ रही थी। 
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surendra singh nagar - फोटो : ट्विटर

बन बैठे थे रामभक्त, भाजपा पर था निशाना

गत लोकसभा चुनाव से पूर्व केंद्र में भाजपा सरकार के साढ़े चार वर्ष पूरे होने के बाद सपा राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने खुद को रामभक्त कहा था। जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं। लेकिन, इसी दौरान उन्होंने अपना स्पष्टीकरण देते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया था।
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