फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: सशक्त भू कानून की मांग को लेकर पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर महिलाएं, लोक नृत्य कर निकाली रैली, तस्वीरें

Sun, 19 Dec 2021 01:22 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 5
- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में सशक्त भू कानून की मांग को लेकर राजधानी देहरादून में गांधी पार्क गेट से शहीद स्थल तक उत्तराखंड महिला मंच की सदस्यों ने रविवार को अनोखा प्रदर्शन किया। पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य करते हुए महिलाओं ने रैली निकाली। अपनी संस्कृति, सम्मान, पहचान और भूमि को बचाने के लिए महिला मंच के स्थापना दिवस पर शहर में भव्य सांस्कृतिक रैली निकाली गई।

उत्तराखंड भू-कानून: गायक जुबिन नौटियाल ने कहा- पहाड़ के लोगों के हितों की रक्षा करने वाला कानून जरूरी

गांधी पार्क से शुरू हुई इस सांस्कृतिक रैली में राज्य आंदोलनकारी मंच, गढ़वाल सभा, देव शक्ति संगठन, युवा शक्ति संगठन शामिल हुए। 2018 के भू कानून को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर सांस्कृतिक रैली गांधी पार्क से प्रारम्भ होकर शहीद स्थल पर समाप्त हुई।

उत्तराखंड भू-कानून: युवा मांगें हिमाचल जैसा सख्त कानून, सोशल मीडिया ने दी आंदोलन को धार

इस दौरान महिलाओं की वेशभूषा और लोक नृत्य ने सबका ध्यान खींचा। इसी तरह हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी भू कानून लागू करने की मांग को लेकर भू अध्यादेश अधिनियम अभियान के तहत प्रदर्शनकारियों का धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मांग पूरी न होने तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
विज्ञापन

2 of 5
- फोटो : अमर उजाला
दीन दयाल उपाध्याय पार्क पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को विभिन्न संगठनों ने भू अध्यादेश अधिनियम अभियान को अपना समर्थन दिया।
 
विज्ञापन

3 of 5
- फोटो : अमर उजाला
वहीं उत्तराखंड रक्षा मोर्चा की सरिता जुयाल ने कहा कि भू कानून लागू नहीं कर सरकार प्रदेश की जनता के साथ धोखा करना चाहती है।
 

4 of 5
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
- फोटो : अमर उजाला
वहीं उत्तराखंड क्रांति दल ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी कर दिया है। जिसमें सशक्त भू कानून को भी शामिल किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि इन चुनावों यह मुद्दा भी अहम हो चला है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें