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यहां साक्षात विराजते हैं भगवान 'हनुमान', किए हैं इतने चमत्कार की यकीन नहीं कर पाएंगे

Sun, 17 Jun 2018 09:17 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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देवभूमि के इस धाम में भगवान हनुमान साक्षात विराजते हैं। यहां आने वालों की बिगड़ी तकदीर संवर जाती है। यकीन न हो तो आप खुद ही आकर देख लीजिए...

 
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neem karoli
मान्यता है कि उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित बाबा नीम करौली के कैंची धाम से कोई भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। यहां पर मांगी गयी मनौती पूर्णतया फलदायी होती है। लोग बाबा को भगवान हनुमान का अवतार मानते हैं। जहां आम जनमानस में बाबा के प्रति भरपूर श्रद्धा है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स जैसी नामी हस्तियां भी इनकी भक्तों में शुमार हैं।
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neem karoli baba
उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हर साल 15 जून को यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। जिसमें देश विदेशों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा के इस धाम में भक्तों की आस्था यूं ही नहीं है। बाबा ने यहां कई ऐसे चमत्कार किए हैं जिन्हें देखकर भक्त खुद हैरानी में पड़ गए।

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neem karoli baba
जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार धाम में आयोजित भंडारे में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया।
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli maharaj
एक अन्य चमत्कार के अनुसार बाबा नीम करौली महाराज ने गर्मी की तपती धूप में एक भक्त को बादल की छतरी बनाकर दी। जिसके बाद वह आराम से अपने गंतव्य को जा सका। फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग भी जब नुकसान होने पर फेसबुक बेचने वाले थे तो बाबा के आशीर्वाद से ही वे इस परेशानी से निकल पाए।

 
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pm modi and mark zuckerberg's baba neem karoli
रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) ने नीम करौली बाबा के चमत्कारों पर 'मिरेकल ऑफ़ लव' नामक एक किताब लिखी इसी में 'बुलेटप्रूफ कंबल' नाम से एक घटना का जिक्र है। एक बुजुर्ग दंपत्ति का बेटा खो गया। लेकिन एक दिन वह अचानक वापस आ गया। उसने बताया कि करीब महीने भर पहले एक दिन वह दुश्मन फौजों के साथ घिर गया था। रातभर गोलीबारी हुई। उसके सारे साथी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया। तब उस दंपत्ति ने बताया कि,बेटे के खोने पर वे नीम करौली बाबा के पास गए थे। जहां बाबा रात को कंबल ओढ़कर सो गए। रातभर वे तड़पते रहे और सुबह कंबल नदी में प्रवाहित करने के लिए कहा। उसी सुबह उनका बेटा वापस आ गया।

(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर पेश किए गए है। )
 
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