इगास पर्व
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इस बीच सात गांवों के ठकुराल ढोल-दमाऊं के साथ दोपहर को मंदिर पहुंचते हैं, उसके बाद ही गुरू कैलापीर बाहर आकर खेत में पहुंचते हैं। फिर देवता निशान के साथ खेतों में दौड़ लगाते हैं। मेले में पहुंचे सैकड़ों लोग भी निशान के साथ खेतों में दौड़ लगाकर पुण्य अर्जित कर मन्नत मांगते हैं। बहू-बेटियां मन्नत पूरी होने पर देवता को भेंट चढ़ाती हैं। खेतों में सात चक्कर लगाने के बाद देवता मंदिर में अपने स्थान पर विराजमान हो जाते हैं। उसके बाद तीन दिनों तक भव्य बलराज मेला लगता है, जिसमें आस-पास गांव की महिलाएं और बच्चे खूब खरीदारी करते हैं।