वकीलों के साथ मृतकों के परिजन
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घटना के वक्त वह पांच साल का था। उसके सामने ही तीन साल की बहन सुखमणि को भी मार डाला गया था। हरमीत ने उस पर भी वार किए, लेकिन वह बेड के नीचे घुस गया। इसके बाद हरमीत ने कहानी बनाई कि जब उससे पूछा जाए तो कहे कि घर में तीन चोर घुसे थे। उन्होंने ही सबको मार डाला है, लेकिन जैसे ही वहां अजीत सिंह पहुंचे तो कंवलजीत उनके गले लग गया। उसने सारी बात बताई कि हरमीत ने नानू, नानी, मम्मी और सुखमणि को मार डाला है।