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शिव मंदिर पर गिरी आकाशीय बिजली: फर्श पर बना त्रिशूल देख सभी हैरान, बोले- बड़ा संकट टला

Mon, 06 Sep 2021 02:58 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मधुबन (हरियाणा)
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शिव मंदिर पर गिरी आकाशीय बिजली। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा के करनाल जिले के मदनपुर गांव में शनिवार की शाम आसमानी बिजली की गर्जना से ग्रामीण सहम उठे। झमाझम बारिश के बीच गांव में चार बार बिजली गिरी। इस दौरान गांव के पुराने शिव मंदिर में जोरदार धमाके के साथ धुआं उठने लगा। बारिश थमने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने मंदिर परिसर पहुंच कर देखा तो गुबंद का ऊपरी हिस्सा और दीवारें क्षतिग्रस्त नजर आईं। वहीं फर्श पर बना त्रिशूल का निशान देखकर लोग हतप्रभ रह गए। लोगों ने इसे मोबाइल कैमरे में कैद कर एक-दूसरे से शेयर किया और देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। किसी ने इसे भोलेनाथ का चमत्कार बताया तो किसी ने शिव की महिमा। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव ने बड़े संकट को अपने ऊपर ले लिया, जिससे हादसा टल गया। मामले में ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्से के पुनर्निर्माण की गुहार लगाई है।
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मंदिर के फर्श पर बना त्रिशूल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नगर निगम के पार्षद प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह, सचदेव कश्यप, रविंद्र, अमन व बनवारी ने बताया कि मंदिर का गुंबद लगभग 90 फुट ऊंचा है, जिसमें ऊपर का लगभग 10 फीट हिस्सा आसमानी बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया है। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान ही आसमानी बिजली गिरने पर जोरदार धमाका हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
धमाका इतना जोरदार था कि मंदिर का मलबा आसपास के घरों तक जा गिरा।  गनीमत यह रही कि बारिश के दौरान कोई ग्रामीण घर से बाहर नहीं था। बिजली गिरने से ग्रामीणों के अधिकतर बिजली उपकरण खराब हो गए हैं। जिन उपकरणों के स्विच बंद थे, वे भी जल गए हैं।

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आकाशीय बिजली गिरने से क्षतिग्रस्त हुआ मंदिर का गुबंद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली के धमाके से बिजली मीटर, इनवर्टर, पंखे सहित अन्य बिजली के सभी उपकरण जल गए, जिससे लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि आसमानी बिजली गुंबद से होती हुई अंदर तक गई लेकिन मंदिर के अंदर कोई नुकसान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने इसे भगवान शिव की महिमा और चमत्कार करार दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रामीणों कहना है कि जैसे पृथ्वी को संकट से बचाने के लिए भगवान ने कभी समुद्र से निकला विष स्वयं ग्रहण कर लिया था, उसी प्रकार क्षेत्रवासियों के संकट को उन्होंने अपने शीर्ष पर धारण कर लिया। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण कर पुनर्निर्माण की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में किसी तरह की अनहोनी न हो।
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