फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

GST लागू करने को तैयार नहीं ये राज्य, एक समस्या बड़ी चुनौती बनी हुई है

Sat, 01 Jul 2017 09:14 AM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 7
gst
देश का एक राज्य जीएसटी लागू करने को तैयार नहीं है। अगर एक समस्या का समाधान किए बिना इसे लागू किया गया तो करोड़ों अरबों का नुकसान होगा।
विज्ञापन

2 of 7
gst
केंद्र सरकार एक जुलाई से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स लागू करने जा रही है, लेकिन पंजाब अभी इसके लिए तैयार ही नहीं है। अभी तक पंजाब के सभी व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुआ है, जिनके लिए एक जुलाई के बाद कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा। एक्साइज टैक्सेशन विभाग केमुताबिक पंजाब में करीब 2.25 लाख वैट डीलर हैं।

 
विज्ञापन

3 of 7
GST
अभी तक इनमें से सिर्फ 88 फीसदी डीलरों का ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुआ है, जिन्हें यूजर आईडी जारी किए गए हैं। बाकी बचे बारह प्रतिशत डीलर एक जुलाई के बाद कारोबार नहीं कर सकेंगे। खासतौर पर दूसरे राज्यों से व्यापार करने वालों केलिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं, पंजाब के बड़ी संख्या में निर्यातक भी प्रभावित होंगे।

4 of 7
जीएसटी - फोटो : SELF
हालांकि केंद्र सरकार ने तीन महीने तक रजिस्ट्रेशन करवाने की छूट दी है, लेकिन जीएसटी नंबर के बिना बिलिंग ही नहीं हो सकेगी। जीएसटी की वेबसाइट में लगातार समस्या आ रही है। उसका सर्वर ही डाउन रहता है, जिसकेचलते रजिस्ट्रेशन हो भी नहीं पा रहे हैं। इस बारे मे राज्य का एक्साइज व टैक्सेशन विभाग कुछ भी करने में असमर्थता जता रहा है।

 
विज्ञापन

5 of 7
GST
जानकारी के मुताबिक विभाग ने पांच माह पहले रजिस्ट्रेशन की कवायद शुरू की थी, लेकिन अब तक विभाग सवा दो लाख डीलरों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं करवा सका। बड़ी संख्या में लोग हैं, जिनके पैन नंबर का विवाद खड़ा हो गया है। पिता ने कारोबार शुरू किया, अपना पैन नंबर देकर टिन नंबर ले लिया। पिता की मौत हो गई, बेटा कारोबार चलाता रहा।

 
विज्ञापन

6 of 7
gst
जब जीएसटी के रजिस्ट्रेशन का समय आया तो पिता का पैन नंबर खारिज हो गया। बेटे अपने अपना पैन नंबर एक्साइज विभाग को दिया, लेकिन विभाग ने अब तक उसे अपने सिस्टम पर अपलोड नहीं किया। अब ऐसे लोग असमंजस में हैं कि एक जुलाई से उनके कारोबार का क्या होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
जीएसटी
ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने पहले पार्टनरशिप में कारोबार शुरू किया, बाद में अलग हो गए। पर उनकी जीएसटी पार्टनरशिप के नाम पर जारी हो गई। ये लोग विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, अधिकारियों को फोन कर रहे हैं, पर कोई भी इनकी मदद नहीं कर रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें