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Ajab-Gajab: महिलाओं नहीं पुरुषों के लिए बनाए गए थे सैनिटरी पैड्स, जानिए इसकी दिलचस्प कहानी

Wed, 14 Jun 2023 12:35 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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interesting and fun facts about period products - फोटो : iStock
Ajab-Gajab: महिलाओं में मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इस दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, नहीं तो संक्रमण का खतरा रहता है। मासिक धर्म के दौरान ज्यादातर महिलाएं सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं। सैनिटरी पैड्स के ऊपर पैडमैन नाम की फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें अक्षय कुमार राधिका आप्टे मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में सैनिटरी पैड्स के महत्व को बताया गया है। 

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले सैनिटरी पैड महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए बनाए गए थे। माय पीरियड ब्लॉग' की एक पोस्ट के मुताबिक, सैनिटरी पैड को सबसे पहले प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान तैयार किया गया था। इस नैपकीन को सैनिकों को गोलियों से बचाने वाले बेंजमिन फ्रेंकलिन के एक आविष्कार से प्रेरित होकर पहली बार बनाया गया था। सैनिटरी पैड को बनाते समय यह विशेष ध्यान रखा गया था कि यह आसानी से खून को सोक सके। इसके अलावा एक इस्तेमाल किए जाने के बाद इसे आसानी से नष्ट (डिस्पोज) किया जा सके।
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interesting and fun facts about period products - फोटो : Pixabay
रिपोर्ट के मुताबिक, इसस पहले कोई भी सैनिटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करता था। फ्रांस में जब सैनिकों के लिए सैनिटरी पैड बनाए गए तो, यहां पर काम करने वाली अमेरिकी नर्सों ने भी पीरियड्स के दौरान इनका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
 
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interesting and fun facts about period products - फोटो : Pixabay
कॉटेक्स नाम की एक कंपनी ने साल 1888 में युद्ध में इस्तेमाल किए गए पैड के आधार पर 'सैनिटरी टावल्स फॉर लेडीज' के नाम से सैनिटरी पैड बनाना शुरू किया। इससे पहले जॉनसन एंड जॉनसन ने 1886 में 'लिस्टर्स टावल्स' नाम से डिस्पोजबल नैपकिन्स बनाना शुरू कर दिया था।

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interesting and fun facts about period products - फोटो : iStock
इन पैड को रुई की तरह दूसरे फाइबर को अब्जॉर्बेट लाइनर से कवर करके तैयार किया जाता था, लेकिन यह पैड उस समय इतने महंगे होते थे कि महिलाओं के लिए खरीदना दूर की कौड़ी थी। लिहाजा अमीर घरों की महिलाएं ही सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती थीं।

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interesting and fun facts about period products - फोटो : iStock
समय के साथ सैनिटरी नैपकिन के रूप में भी कई बदलाव हुए। आम महिलाओं के लिए भी यह धीरे-धीरे उपलब्ध होने लगे, लेकिन आज भी हमारे देश के कई इलाकों में महिलाओं के पास अच्छे सैनेटरी पैड खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं और वह इसको अपनी ही सुरक्षा, जरुरत के लिए प्रयोग नहीं कर पा रही हैं।

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आधुनिक समय में भी सैनिटर पैड के मामले में ही नहीं, बल्कि पीरियड्स को भी समाज में अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है। इस शब्द पर महिलाएं क्या पुरुष भी बात करने से हिचकिचाते हैं। यह शब्द सुनते ही लोग असहज होने लगते हैं। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि अपनी शारीरिक प्रक्रिया के बारे में खुद महिलाएं भी खुलकर बात नहीं करती हैं।

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महिलाओं में आमौतर पर पीरियड्स की शुरुआत 12 साल की उम्र में हो जाती है। आज भी कई घरों में पीरियड्स के दौरान महिलाएं रसोई घर में नहीं जा सकती हैं। मंदिर में जाना पाप माना जाता है। लड़कियों और महिलाओं को इस दौरान कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
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