वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को बहुत ही महत्व दिया जाता है। शनि को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। यह किसी एक राशि में ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि के राशि परिवर्तन करने से सभी 12 राशियों पर प्रभाव अवश्य ही पड़ता है। शनि के राशि परिवर्तन करने से कुछ राशि वालों पर साढ़ेसाती लग जाती है वहीं कुछ राशि पर से यह खत्म हो जाती है। शनि किसी एक राशि में दोबारा आने में करीब 30 वर्ष का समय लगाते हैं। शनि अभी अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं। इस कारण से शश नाम का राजयोग भी बना हुआ है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि जब अपनी स्वराशि मकर और कुंभ में होते हैं या फिर अपनी उच्च राशि में होकर कुंडली के केंद्र भाव में स्थिति होते हैं शश राजयोग का निर्माण करते हैं। शनि के कुंभ राशि में होने से और शश राजयोग बनने से कुछ राशि वालों की किस्मत चमक सकती है।