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रो-रो कर बोली मां, मेरी सोनिया बेकसूर

Thu, 04 Apr 2013 06:25 PM IST
नई दिल्ली/शशांक
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साल 2001 के बहुचर्चित पूर्व विधायक रेलूराम नरसंहार कांड के दोषी संजीव और सोनिया की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज होने की खबर जैसे ही मां राजबीरी और पिता अनुप सिंह को मिली तो उनकी आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई।
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उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जिन पांच दया याचिकाएं खारिज की है, उनमें एक महिला भी शामिल है। आजाद भारत में संभवत: पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा देने पर राष्ट्रपति ने मुहर लगाई है।

फोन पर मिली सूचना के बाद सोनिया की मां का रो-रो कर बुरा हाल था। नई दिल्ली के खलासी लाइन के लक्ष्मणपुरी स्थित मकान पर पिता बार-बार यही कह रहे हैं कि न्याय पर भरोसा है। मगर, हमें न्याय नहीं मिला है।
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उधर, संजीव-सोनिया का 14 साल का बेटा इन सबसे बेखबर है। उसके स्कूल से आने से पहले ही दादी-दादा खुद को सामान्य करने में लगे हुए हैं।

मां राजबीरी कहती है कि मेरे बेटे-बहू ऐसे नहीं थे। मगर, कुछ लोगों ने साजिश कर उन्हें फंसाया। अब इसकी सजा पूरा परिवार भुगतेगा।

संपत्ति को लेकर शुरू हुआ था विवाद
जूडो एक्सपर्ट संजीव सिंह ने सोनिया से प्रेम विवाह किया था। 29 सितंबर 1998 को परिवार वालों की मौजूदगी में दोनों की शादी हुई।

मगर, इस शादी से पूर्व विधायक और सोनिया के पिता रेलूराम कत्तई खुश नहीं थे। कारण, संजीव की आर्थिक हैसियत उनके मुकाबले बेहद कमजोर थी।

सोनिया को डर था कि पिता उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं देंगे। केस डायरी के अनुसार एक विवाद के दौरान रेलूराम ने सोनिया को थप्पड़ मारा था तो उसने संजीव के साथ मिलकर बेहद खौफनाम वारदात को अंजाम दिया था।

हिसार फार्म हाउस पर सोनिया की बहन प्रियंका के 19वें जन्मदिन जश्न के लिए सब एकत्र हुए थे। वहीं संजीव और सोनिया ने इस नरसंहार को अंजाम दिया था।

घटनाक्रम एक नजर में
23 अगस्त 2001 को सोनिया ने पति संजीव के साथ मिलकर अपने पिता रेलूराम, मां कृष्णा, बहन प्रियंका, भाई सुनील, भाभी शकुंतला, उसके तीन मासूम बच्चे लोकेश, शिवानी और मात्र 45 दिन की प्रीति की रात को हत्या कर दी थी।

इस मामले में 31 मई 2004 को हिसार के सेशन कोर्ट ने सोनिया और संजीव को सजा-ए-मौत सुनाई। 12 अप्रैल 2005 को हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।

15 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए फांसी की सजा सुनाई। 23 अगस्त 2007 को सेशन जज ने पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया।
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1 सितंबर 2007 को सेशन जज 26 नवंबर 2007 का दिन फांसी के लिए मुकर्रर किया। इस बीच दोनों ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेज दी।

17 फरवरी 2009 को तत्कालीन गृहमंत्री ने दया याचिका की फाइल पर 'बी रिजेक्टेड!' लिखा। फरवरी 2013 में गृह मंत्रालय ने दया याचिका भेजी।
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