पत्रकार धीरेंद्र सिंह हत्याकांड में एडीजे महताब अहमद की अदालत ने शुक्रवार को साइको किलर रामनिरंजन उर्फ राजा कोलंदर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या में उसके सहयोगी वक्षराज को भी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। साक्ष्य नष्ट करने और धीरेंद्र की बाइक आदि अपने कब्जे में रखने के लिए दोनों को अलग से सजा सुनाई।
कोलंदर और वक्षराज को अदालत ने बृहस्पतिवार को ही पत्रकार धीरेंद्र हत्याकांड में दोषी करार दिया था। पत्रकार हत्याकांड के बाद पुलिस पूछताछ में उसने कबूल किया था कि वह अपने एक शिकार का बेरहमी से कत्ल करने के बाद भेजा उबालकर पी गया था, ताकि उसका दिमाग तेज हो सके। उसने 14 दिसंबर 2000 को धीरेंद्र सिंह की हत्या कर पहले उसका गुप्तांग काटा और फिर सिर और धड़ को अलग कर मध्यप्रदेश के रीवा में दो अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया था।
पत्रकार हत्याकांड में मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर गिरफ्तारी के बाद उसके नैनी स्थित फार्म हाउस से पुलिस ने तीन नरमुंड, कर्वी चित्रकूट से दो नरकंकाल, चकहिंडोला से दो मृतकों के कपड़े, चित्रकूट से तीन नरमुंड और नैनी से दो सिरविहीन लाशें बरामद की थी।
साक्ष्य कमजोर थे इसलिए नहीं हुई फांसी
भले ही पत्रकार धीरेंद्र के परिजन कोलंदर के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं। उसकी करतूतों को जानने वाले भी यही कहते हैं कि कोलंदर के लिए फांसी के सिवाए कोई भी सजा कम है। पर पत्रकार धीरेंद्र हत्याकांड में साक्ष्य इतने मजबूत नहीं थे कि कोलंदर को फांसी सुनाई जा सके। हत्याकांड के सभी साक्ष्य परिस्थितिजन्य थे। चश्मदीद गवाह और हत्या के स्पष्ट उद्देश्य को प्रमाणित कर पाने में अभियोजन नाकाम रहा।
बचाव पक्ष के वकील ताराचंद्र गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के हवाले से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर सजा नहीं दिए जाने की दलील दी। इसके विरोध में अपर शासकीय अधिवक्ता केसी पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों की दलील देते हुए कहा कि साक्ष्य इतने पर्याप्त हैं कि अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई जा सकती है। अभियोजन तकनीकी आधारों पर इसे एक विलक्षण हत्याकांड साबित नहीं कर सका। अदालत ने सजा पर विचार करते हुए उम्रकैद की सजा को उचित पाया।
बेटा-पत्नी ने कहा, फंसाए गए कोलंदर
दशक के सबसे चर्चित हत्याकांड पत्रकार धीरेंद्र सिंह के मुख्य कातिल को कोर्ट ने दोषी करार दिया लेकिन राजा कोलंदर के अपने ‘अदालत’ की नजर में वह बेनुगाह है। अदालत, राजा कोलंदर के बड़े बेटे का नाम है। उसने कहा कि राजा कोलंदर को सियासत के तहत फंसाया गया है। घटना के समय वह पंद्रह साल का था और दो साल बालबंदी गृह लखनऊ में बंद था। कोलंदर की पत्नी पूर्व जिला पंचायत सदस्य फूलनदेवी भी पति को निर्दोष बता रही हैं। उनका कहना कि पति को साजिशन फंसाया जा रहा है। उनका कहना है कि पति पर धनुहा निवासी सुल्तान की भी हत्या का पुलिस ने आरोप लगाया था लेकिन वह जिंदा निकला। बेटे ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा।
क्या था मामला
पत्रकार धीरेंद्र सिंह का ससुराल शंकरगढ़ के बेरी बसहरा गांव में था। उसी गांव में राजा कोलंदर का ससुराल था। 14 दिसंबर 2000 की रात राजा कोलंदर ने धीरेंद्र सिंह को अगवा हत्या। गुप्तांग काटा। सिर कटी लाश उसने रीवा जिले के बरेही में और सिर कस्बा रायपुर बाढ़ सागर रीवा में फेंक दिया।
हत्या की वजह
धीरेंद्र सिंह के भाई ने जो मुकदमा दर्ज कराया था, उसमें चुनावी रंजिश को कारण बताया गया था लेकिन पुलिस का मानना है कि धीरेंद्र सिंह को राजा कोलंदर के कई राज पता चल गए थे जिसे लेकर दोनों में विवाद था। धीरेंद्र सिंह का राजा कोलंदर के ससुराल आना जाना था जो उसे पसंद नहीं था और वह कई दफे चेतावनी भी दे चुका था।
आदमखोर, नरभक्षी और नरमुंड पुजारी
कोलंदर की जघन्य हत्याओं का राज खुला तो शहर में उसके कई नामों की चर्चा होने लगी थी। किसी ने उसे आदमखोर कोलंदर कहा तो किसी ने नरभक्षी। फार्म हाउस में नरमुंड मिलने लगे तो उसे नरमुंडों का पुजारी कहा गया। हत्या के बाद गर्दन काटना, किसी का गुप्तांग काटना कोलंदर की आदत में शुमार था। पुलिस के समक्ष उसने कबूल किया था कि एक व्यक्ति की गर्दन काटने के बाद उसकी खोपड़ी उबाल कर पी गया था। यह घिनौनी करतूत उसने इसलिए की ताकि उसका दिमाग और तेज हो सके। शहर के लोग उसे साइको किलर, इंसान की शक्ल में हैवान, खूनी दरिंदा आदि नामों से पुकारने लगे थे।
जेल के खाने से परहेज
जघन्य हत्याओं का दोषी राजा कोलंदर जेल में भी नाटक करता रहा है। कई सालों से उसने जेल का खाना नहीं खाया। खाना न खाने की वजह से उसे जेल में दूध दिया जाने लगा। कोलंदर दूध ही पीता है। परिवार और रिश्तेदार उससे मिलने जाते तो फल व अन्य सामान दे देते थे। कोलंदर उसे खाता। उसे जेल के सर्किल नंबर एक में तनहा रखा गया है। अकेला सीखचों में पड़ा रहने वाला कोलंदर जेल में भी अजीब हरकतें करता है।
नाम - राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर
पता - राम सागर गांव, थाना नैनी
नौकरी - सीओडी छिवकी में ड्राइवर (नौकरी छोड़ी)
पत्नी - फूलनदेवी, जिला पंचायत सदस्य (वर्ष 2000 में)
मुकदमे - 13, हत्या और लूट
मॉडस अपरेंडी - सिर धड़ से अलग करना, नरमुंड अपने फार्म हाउस की जमीन में गाड़ देना
क्रूरता - कायस्थ, ब्राह्मण और मुस्लिम युवक की खोपड़ी को पेंट कर फार्म हाउस में रखा था
पागलपन - इंसानी खोपड़ी को उबाल कर खा जाना