मुरादाबाद में पुलिस कप्तान धर्मवीर पर एक्शन का चाबुक चल गया है। चुनाव आयोग ने भाजपा की सिफारिश पर उन्हें हटा दिया। कांठ बवाल के बाद से ही धर्मवीर भाजपा के निशाने पर थे। पार्टी के विधायकों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कांठ थाने में तहरीर तक दी।
मुख्यमंत्री से भी मिले थे पार्टी के लोग। तब कार्रवाई नहीं हुई लेकिन अब आयोग में ठाकुरद्वारा उप चुनाव को लेकर भी शिकायत की गई थी। आरोप लगाया गया था कि उनके रहते चुनाव में पक्षपात की संभावना है।
एसएसपी धर्मवीर को ज्वाइनिंग के साथ ही कांठ बवाल फेस करना पड़ा था। यहीं से वह विवादों में घिरते चले गए। एक एसडीएम को भाजपा नेता समझकर पीट दिया था।
यह मामला भी प्रदेश भर में सुर्खियां बना। शासन तक पहुंचा तो माफी मांगी। इसके बाद कांठ थाने में प्रेस कांफ्रेंस करके ऐसा बयान दिया जिससे उन पर सपा प्रवक्ता होने के आरोप लगने लगे। कह दिया था कि कांठ बवाल भाजपा ने कराया था।
भाजपा विधायक ने उपचुनाव की सियासत गरमाने के लिए दो वर्गों को लड़ाया। इस बयान के बाद भाजपा मुखर हुई और एसएसपी को टारगेट बना लिया। एसएसपी को हटाने की मांग लेकर प्रदेश भर में आंदोलन हुए। भाजपा विधायकों ने तमाम सुरक्षा घेरे को तोड़कर कांठ थाने में एसएसपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी। कुल मिलाकर उनका पूरा कार्यकाल विवादों में घिरा रहा।
उपचुनाव की घोषणा होते ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने चुनाव आयोग से एसएसपी को हटाने की सिफारिश भी की थी। कहा था कि वह सपा के लिए काम कर रहे हैं और चुनाव को प्रभावित करेंगे। इस सिफारिश पर चुनाव आयोग ने एसएसपी को हटा दिया है।