खुशमिजाज लोग अलग ढंग से काम करते हैं। इन लोगों में उत्पादकता, रचनात्मकता और जोखिम लेने की शक्ति हमेशा ज्यादा होती है। अब एक नए शोध में यह भी पता चला है कि कंपनियों के काम करने का तौर तरीका भी खुशियों से प्रभावित होता है।
यानी जिस जगह पर खुशमिजाज लोग रहते हैं वहां पर कंपनियां लांग टर्म के लिए ज्यादा निवेश करती हैं। हाल ही में अमेरिका स्थित लोयोला यूनिवर्सिटी के टूगी कुलुन और ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट के कैरोल ग्राहम ने अपने शोधपत्र में बताया कि खुशहाल शहर में कंपनियां रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कंपनियां भविष्य में निवेश के लिए इस लम्बी सोच को जरूरी मानती हैं।
खुशहाली व निवेश में मजबूत संबंध
शोधकर्ता कुलुन और ग्राहम ने गैलप सर्वे द्वारा मापे गए अमेरिका के औसत खुशहाल शहरों की तुलना वहां निवेश करने वाली कंपनियों की सक्रियता के आधार पर की।
जिन शहरों में जनसंख्या, बिक्री, उद्यम और क्षेत्रफल के आधार पर खुशियां समान रूप से फैली थीं वहां कंपनियों के निवेश और खुशहाली के बीच ज्यादा मजबूत संबंध दिखाई दिए, जबकि जिन शहरों में इनके बीच असमानता थी वहां निवेश बहुत अच्छा नहीं था।