दिल्ली विश्वविद्यालय कॉलेजों में कक्षाओं के समय को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। डीयू के इस फॉर्मूले के लागू होने पर ना केवल सीटें बढ़ेंगी बल्कि छात्रों के लिए दाखिले के अवसर भी बढ़ जाएंगे। प्रशासन इस फॉर्मूले को लेकर कॉलेज प्रिंसिपल से भी बातचीत करेगा। यह फॉर्मूला लागू हो गया तो डीयू में सांध्य व सुबह की पारी के कॉलेज के बीच का फर्क भी खत्म हो जाएगा। अभी डीयू में आठ सांध्य कॉलेज चलते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के प्रत्येक कोने से तीन लाख से अधिक छात्र दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। लेकिन कट ऑफ हाई होने और सीटों की संख्या सीमित होने के कारण काफी छात्रों को दाखिला नहीं मिल पाता है। अब प्रशासन डीयू में सीटों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसके लिए सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक चलाने के बारे में सोचा जा रहा है। यदि डीयू सीटें नहीं बढ़ाएगा तो कौन बढ़ाएगा।
डीयू कुलपति प्रो योगेश सिंह के अनुसार डीयू में भी सीट बढ़ानी चाहिए इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी होने के कारण जरुरी भी है कि सीट बढ़ानी चाहिए। इसके लिए कॉलेज में कक्षाओं के समय को सुबह आठ बजे से शाम छ: बजे तक किया जा सकता है। इस फॉर्मूले को सभी की सहमति के बाद ही अमल में लाने का सोचा जाएगा। इस फॉर्मूले के अमल में आने से हम ज्यादा छात्रों का दाखिला हो सकेगा। कक्षाओं का समय बदलने से छात्रों व शिक्षकों का समय ही बदलेगा।
वर्ष 1922 में जब डीयू की शुरुआत हुई थी तब केवल तीन कॉलेज सेंट स्टीफंस, रामजस और हिंदू थे। तब छात्रों की संख्या 750 थी। अब जब डीयू अपने स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है तब सीटों की संख्या सात लाख हो चुकी है। मालूम हो कि डीयू में आर्थिक पिछड़े वर्ग का कोटा 25 फीसदी बढ़ाया गया था। इसे दो चरणों वर्ष 2019 और 2020 में बढ़ाया गया। इस कारण से स्नातक स्तर की सीटों की संख्या भी करीब 70 हजार पहुंच गई है।