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पंजाब चुनाव 2022: इन पांच वजहों से आम आदमी पार्टी बनी पंजाब की 'सरदार'

रवींद्र भजनी
Updated Thu, 10 Mar 2022 09:52 PM IST

सार

पंजाब विधानसभा चुनावों के परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी स्पष्ट विजेता बनकर उभरी है। आइये जानते हैं वह 5 कारण, जिनकी वजह से आप कुछ ही साल में राज्य में एक नंबर पार्टी बनने में कामयाब हुई। 
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अमर उजाला ग्राफिक्स


पंजाब में परंपरागत रूप से कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का ही दबदबा रहा है। इस बार हालात अलग थे। कांग्रेस, आप, शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन और भाजपा-पंजाब लोक कांग्रेस गठबंधनों ने ज्यादातर सीटों पर मुकाबलों को बहुकोणीय बना दिया। चुनाव से ठीक एक महीने पहले आप ने संगरूर के सांसद भगवंत सिंह मान को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दिया। यह भी आप के पक्ष में गया। राज्य के मालवा प्रांत में मान एक लोकप्रिय सिख चेहरा है। 


पंजाब में आप के उभरने के मुख्य कारण- 


सत्ता-विरोधी मतः कांग्रेस की चन्नी सरकार के खिलाफ जबरदस्त माहौल था। इससे सत्ता-विरोधी मत एकजुट हो गए। पंजाब में कांग्रेस न रोजगार के साधन दे पाई और न ही नशाखोरी से मुक्ति दिला सकी। भ्रष्टाचार भी जस का तस मुद्दा बना रहा। बेरोजगारी एक प्रमुख समस्या रही है। 2017 में कांग्रेस ने शिरोमणि अकाली दल की सरकार को चुनौती देने के लिए घर-घर नौकरी का वादा किया था। इसे पूरा करने में कांग्रेस पूरी तरह नाकाम रही है।  2021 के अंत में पंजाब में बेरोजगारी की दर 7.85 प्रतिशत थी। 




कांग्रेस की कलह: पंजाब कांग्रेस में जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में तनातनी थम नहीं रही है। इससे उसके वोट शेयर पर नेगेटिव असर पड़ा है। पिछले साल सितंबर में अमरिंदर सिंह से इस्तीफा ले लिया गया था। इससे सिख आबादी कुछ हद तक कांग्रेस से नाराज भी थी। पंजाब कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू, मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सुनील जाखड़ के बीच अनबन की खबरों से पार्टी की छवि खराब हुई है। 


दिल्ली मॉडल: आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली मॉडल दिखाकर पंजाब के मतदाताओं का ध्यान खींचा। 2014 लोकसभा चुनावों में पार्टी ने तीन सीट जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी। उस समय तो दिल्ली तक में आप को एक भी सीट नहीं मिली थी। तब से पंजाब में आप को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल का तगड़ा प्रतिस्पर्धी माना जा रहा था।  


आप का चुनावी एजेंडा: आप के 10 सूत्री चुनाव एजेंडा में बेरोजगारी, नशाखोरी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुख थे। आप ने चुनावी घोषणा पत्र में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति में सुधार का वादा किया था। दिल्ली में आप की सरकार ने यह करके दिखाया है, इस वजह से लोगों का भरोसा भी हासिल किया। किसानों की समस्याओं को हल करने का वादा भी आप के पक्ष में रहा। 


किसानों का विरोध: केंद्र की भाजपा सरकार 2020 में तीन कृषि कानून लेकर आई तो पंजाब के किसान उन्हें रद्द करने के लिए आंदोलन करने में सबसे आगे थे। इस मुद्दे पर केजरीवाल पूरी तरह किसानों के साथ खड़े दिखाई दिए। आप नेता नियमित रूप से धरना स्थलों पर जाते थे। किसान नेताओं के आंदोलन का समन्वय करते थे। इसका भी फायदा आप को मिला।  
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