धार्मिक नगरी उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी के नाम से तो विश्वविख्यात है लेकिन इस नगरी की विशेषता यह भी है कि इस नगरी में कई ऐसे अति प्राचीन और पौराणिक तथ्य है जो कि पूरे विश्व में इस नगरी की एक अलग ही पहचान बनाए हुए हैं।
चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी पर गुरुवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान श्री राम का जन्म उत्सव सर्वार्थ सिद्धि योग में भगवान श्री राम के पूजन अर्चन ओर जन्म आरती के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा। शहर के बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि बड़ा सराफा क्षेत्र में राम जी की गली में भगवान श्रीराम का एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्री राम की चलायमान प्रतिमा है। इसमें भगवान श्री राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और हनुमान जी के साथ राजा राम स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित आशीष शर्मा बताते हैं कि एक ही पाषाण पर बनी यह प्रतिमा वर्षों पुरानी और अति प्राचीन है। यह प्रतिमा विष्णु सागर से खुदाई के दौरान निकली थी। उन्होंने बताया कि मंदिर में वैसे तो हर पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन यहां दशहरे पर रावण दहन के बाद दर्शन करने की विशेष परंपरा है जिसका निर्वहन आज भी भक्त करते हैं। पंडित शर्मा ने बताया कि रामनवमी पर गुरुवार को भगवान का विशेष पूजन-अर्चन करने के साथ दोपहर को जन्म आरती की जाएगी। छप्पन भोग लगाया जाएगा।
हर्षोल्लास के साथ मनेगा रामनवमी पर्व
गुरुवार के दिन देशभर में राम नवमी को पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। प्रत्येक वर्ष यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन ही भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इस विशेष दिन सभी मठ एवं मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और भगवान श्री राम की पूजा-अर्चना की जाएगी।