उज्जैन की सेंट्रल जेल भैरवगढ़ के जीपीएफ गबन कांड मे रोज नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस आरोपियों की संपत्ति का रिकार्ड निकाल रही है। आने वाले दिनों में गिरफ्तार आरोपियों की संपत्ति तोड़ना या राजसात करना है, इस पर पुलिस विचार कर रही है।
सेंट्रल जेल भैरवगढ़ के जीपीएफ गबन कांड में अभी तक जांच के आधार पर पुलिस ने आठ लोगों पर प्रकरण दर्ज किए हैं। इनमें से पूर्व जेल अधीक्षक उषा राज, जेल के अकाउंटेंट रिपुदमन सिंह, तीन सटोरिए तथा कल इस मामले में जगदीश पांचाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एडिशनल एसपी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार ने बताया कि आरोपी जगदीश पर प्रकरण दर्ज है। एडिशनल एसपी बाकलवार ने बताया कि सभी आरोपियों की उनकी भूमिका के आधार पर संपत्ति को सर्च किया जा रहा है। कई लोगों की संपत्ति की जानकारी मिल चुकी है। अब पुलिस यह विचार कर रही है कि इस मामले में गबन की राशि को रिकवर कैसे किया जाए? शासन के नियमानुसार संपत्ति राजसात की जाए या उस पर बुलडोजर चलाया जाए, इस पर विचार चल रहा है। इस संबंध में नियमानुसार कार्रवाई होगी। आरोपियो को गिरफ्तार कर उन पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
एसआईटी की चार टीमें कर रही हैं जांच
केंद्रीय भैरवगढ़ जेल मे हुए 13.54 करोड़ के जीपीएफ घोटाले का एसआईटी जल्द खुलासा करने वाली है। इस मामले मे चार टीमें जांच कर रही है। उषा राज और रिपुदमन सिंह से भी रिमांड के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी है। जीपीएफ घोटाले में देवास के एक सटोरिए द्वारा लेनदेन करने की बात सामने आने पर एक टीम वहां भी गई थी। सटोरिया तो नहीं मिला लेकिन जानकारी जरूर मिली है।
उषा राज की बिगड़ी तबियत
जीपीएफ घोटाले में शिकंजा कसने के बाद से ही पूर्व जेल अधीक्षक उषा राज की तबियत बिगड़ रही है। कुछ दिन पहले पूछताछ के दौरान वह सीने में दर्द की बात कहकर इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती हो गई थी। मंगलवार रात को भी भैरवगढ़ थाने में पूर्व जेल अधीक्षक उषा राज ने तबीयत खराब होने की बात की ती। उन्हें जिला चिकित्सालय ले जाया गया था, जहां जांच में सबकुछ सामान्य निकला।
जगदीश परमार ने खोले कई राज
पूर्व जेल अधीक्षक उषा राज के खास जगदीश परमार ने अपनी गिरफ्तारी के पहले मंगलवार को पत्रकार वार्ता में जीपीएफ घोटाले के कई राज खोले थे। बताया था कि इस पूरे घोटाले के नगद में किया जाता था। जिसे जेल शाखा के सहायक लेखा अधिकारी रिपुदमन सिंह जेल प्रहरी धर्मेंद्र लोधी और शैलेंद्र सिंह सिकरवार अंजाम देते थे। जगदीश परमार ने गबन का यह रुपया शहर के टेंट संचालक, व्यापारी और बिल्डरों के पास होने के साथ ही जेब से एक पर्ची निकाल कर भी बताई थी।
सिकरवार और लोधी को ढूंढ रही पुलिस
पुलिस इस मामले मे जेल अधीक्षक के ड्राइवर रह चुके शैलेंद्र सिंह सिकरवार और धर्मेंद्र लोधी को ढूंढ रही है। पुलिस दल उनकी तलाश में जगह-जगह दबिश दे रहा है। इस मामले में और भी आरोपियों के नाम बढ़ सकते हैं।