उज्जैन जिले के कायथा में स्थित सेवा सहकारी संस्था में 25 वर्षों पूर्व हुए एक गबन के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश तराना ने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को यथावत रखते हुए एक फैसला सुनाया है। इसके बाद संस्था के सचिव, सेल्समैन और लिपिक को अब जेल भेजने के आदेश हो चुके हैं।
शासकीय अधिवक्ता सरदार सिंह चौहान ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 25 अक्टूबर 1999 को कायथा के तत्कालीन थाना प्रभारी एनपी शुक्ला को यह शिकायत प्राप्त हुई थी कि सेवा सहकारी संस्था सुमराखेड़ी में सदस्यों की राशि के साथ लाखों की गड़बड़ी हुई है। इस शिकायत के बाद जब दल गठित कर पूरे मामले की जांच की गई तो अनियमितता सामने आई।
ये है मामला
जांच में पता चला कि सहकारी संस्था के जिम्मेदारों ने यहां के सदस्यों को फर्जी रसीद थमाकर रुपया उनके खातों में जमा नहीं कराया। 25 सदस्यों के साथ 1,86,330 की गड़बड़ी की गई, जिसकी अनियमितता रसीद कट्टों में मिली। इसके साथ ही सदस्यों को 3,21,070 की गड़बड़ी खाद के रूपों के नाम पर की गई। वहीं सार्वजनिक राशन वितरण में भी 1,086 रुपये कुल मिलाकर 5,08,486 रुपये की अनियमितता पाई गई।
3-3 वर्ष की सजा सुनाई गई
शासकीय अधिवक्ता सरदार सिंह चौहान ने बताया कि इस अनियमितता के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया था, जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी समरेश सिंह तराना, जिला उज्जैन के द्वारा सेवा सहकारी संस्था सुमराखेड़ी के सचिव शेख अयूब पिता मुंशी खान उम्र 53 वर्ष निवासी तराना, सेल्समेन कृष्ण कुमार पिता ओमप्रकाश गर्ग उम्र 50 वर्ष निवासी बजरंग कॉलोनी तराना और लिपिक भेरूलाल पिता पर्वत राठौर 42 वर्ष निवासी छोटा बाजार कायथा को अलग-अलग धाराओं में 3-3 वर्ष की सजा सुनाई थी।
इस सजा के बाद संस्था के सचिव, सेल्समैन और लिपिक ने अपर सत्र न्यायाधीश राजेश सिंह तराना जिला उज्जैन के न्यायालय में एक अपील की थी। उसमें भी न्यायाधीश राजेश सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी समरेश सिंह द्वारा दिए गए फैसले को यथावत रखते हुए इस सजा और जुर्माने को बरकरार रखा है।