पिता के हत्या के चश्मदीद मासूम ने किया पर्दाफाश
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पिता की हत्या का गवाह कोई और नहीं, खुद उसका 10 साल का मासूम बेटा था। उसी बच्चे के एक वाक्य ने पूरी कहानी पलट दी और कोर्ट ने मां सहित तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुना दी। मामला भैरवगढ़ थाना क्षेत्र के झिरन्या गांव का है। 24 दिसंबर 2022 को जितेंद्र बंजारा की हत्या कर लाश घर के पास गड्ढे में फेंक दी गई थी। पहले तो पत्नी पूजा ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सच उसके ही घर में मौजूद था। हत्या के वक्त जितेंद्र का 10 साल का बेटा घर में ही था और अपनी आंखों से उसने सब कुछ देख लिया था।
पंचम अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा की कोर्ट में जब बच्चे को पेश किया गया तो वह अपनी मां को देखकर फूट पड़ा। बच्चे ने जज के सामने साफ कहा कि उसे मां की सूरत नहीं देखनी क्योंकि उसी ने पापा को मारा है। पुलिस ने भी बच्चे को ही मुख्य चश्मदीद गवाह बनाकर केस डायरी तैयार की थी। उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र कुमार खांडेगर के मुताबिक सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका इसी बच्चे की गवाही की रही। विशेष लोक अभियोजक भारत सिंह कनेल और नीतिश कृष्णन ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा।
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आरोपी बोले- बच्चे को सिखाया गया है
बचाव पक्ष ने दलील दी कि परिवार ने बच्चे को सिखा-पढ़ाकर कोर्ट में पेश किया है। इस पर अभियोजन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो बच्चा पिता को खो चुका है, वो अपनी मां के खिलाफ इतनी बड़ी बात तब तक नहीं कहेगा, जब तक उसने खुद अपनी आंखों से सब न देखा हो। कोर्ट अभियोजन की दलील से सहमत हुआ। कोर्ट ने पत्नी पूजा, उसके प्रेमी राकेश कुशवाह और सहयोगी ईश्वर सिंह बंजारा को आजीवन कारावास और 31-31 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाकर भैरवगढ़ जेल भेज दिया है।
ऐसे हुई थी हत्या
जांच में सामने आया कि जितेंद्र ने अपनी पत्नी पूजा को घर में प्रेमी राकेश के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। विरोध करने पर राकेश ने अपने साथी ईश्वर को बुला लिया। पूजा ने पति के सिर पर हथौड़ी से वार किया, दोनों आरोपियों ने लात-घूंसों से पीटा और अंत में राकेश ने गर्दन मरोड़कर जितेंद्र को मार डाला।