उज्जैन की शिप्रा नदी में दीपदान के लिए पहुंचे लोग।
- फोटो : सोशल मीडिया
धर्म नगरी उज्जैन में शुक्रवार को शिप्रा नदी दीपों की रोशनी से नहाई। घाटों पर दीयों का उजास फैला और पूर्णिमा के चंद्र की तरह रोशनी बिखरी। कोरोना की भयावह त्रासदी के बाद यह पहला मौका था जब घाटों पर दीपदान के लिए हजारों लोग पहुंचे। कार्तिक पूर्णिमा पर पर्व स्नान के साथ लोगों ने दीपदान किया।
दीपदान करते हुए युवती
दीपदान करते हुए युवती
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दरअसल, मान्यता है कि कार्तिक मास में स्नान करने वाली महिलाएं पूर्णिमा पर नदी और सरोवरों में स्नान कर व्रत का समापन करतीं है। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान के लिए नदी तट पहुंचते हैं। इसके चलते शुक्रवार को उज्जैन की शिप्रा नदी के घाटों पर भीड़ रही। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने शिप्रा स्नान किया और घाट पर दीपदान किया। उज्जैन में शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट, सुनहरी घाट सहित अन्य घाटों पर भीड़भाड़ रही और लोग दर्शन के लिए पहुंचे। अधिकांश लोगों ने स्नान के बाद घाटों पर ही भोजन बनाया। दीपों की रोशनी से घाट जगमगा उठे। ग्रामीण अंचल से आए लोगों में मेले का उत्साह रहा। हर बार कार्तिक मेला लगता है लेकिन इस बार मेले की तैयारी पूरी नहीं हो सकी। इस कारण लोगों ने फुटपाथ पर ही दुकानें लगाईं।
देवास की शिप्रा नदी पर भी पहुंचे लोग
उज्जैन से लगे देवास में भी शिप्रा नदी तट पर शुक्रवार शाम को बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जो लोग उज्जैन नहीं जा पाते हैं वे देवास स्थित शिप्रा नदी में दीपदान करते हैं। इंदौर से भी कई लोग दीपदान के लिए देवास-उज्जैन जाते हैं। देवास में शुक्रवार को शिप्रा जाने वाले लोगों की इतनी भीड़ उमड़ी की बायपास पर जाम की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में लोग दीपदान के लिए पहुंचे।