मध्य प्रदेश के सिंगरौली में फ्लाई ऐश बांध टूटने की घटना में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए नेशनल ग्रीन टिब्यूनल ने मुआवजा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने शेष राशि का भुगतान एक महीने के अंदर करने का निर्देश दिया। बता दें कि 10 अप्रैल, 2020 को सिंगरौली में रिलायंस के सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के फ्लाई ऐश डाइक में दरार आई थी।
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि हम एक महीने के भीतर शेष राशि का भुगतान करने का निर्देश देते हैं। यह आदेश पीड़ितों के उत्तराधिकारियों को उचित मंच से संपर्क करके उच्च मुआवजे का दावा करने से वंचित नहीं करेगा। यदि पीड़ितों को मुआवजे के रूप में नियुक्त व्यक्तियों का वेतन न्यूनतम मजदूरी से कम है, तो इस विषय पर कानून का अनुपालन सुनिश्चित कर सकता है, जिसे यूपी और एमपी के संबंधित श्रम विभागों द्वारा भी देखा जा सकता है, न्यायाधिकरण ने कहा कि वैधानिक नियामक पर्यावरण की बहाली और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एनजीटी द्वारा गठित की समीति की सिफारिशों के संदर्भ में आगे की उपचारात्मक कार्रवाई कर सकती हैं।
एनजीटी ने फ्लाई ऐश प्रबंधन और उपयोग मिशन के गठन का भी आदेश दिया, जिसका नेतृत्व संयुक्त रूप से पर्यावरण और वन, कोयला और बिजली मंत्रालय के सचिव और उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे। बेंच ने कहा कि सचिव, एमओईएफ समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी होगी। मिशन फ्लाई ऐश के प्रबंधन और निपटान से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ सभी संबंधित मुद्दों पर उपरोक्त चर्चा के संबंध में समन्वय और निगरानी करेगा। स्थिति का जायजा लेने और कार्य योजना तैयार करने के लिए एक माह का समय दिया गया है। एक माह के भीतर अपनी पहली बैठक आयोजित कर सकते हैं।
न्यायाधिकरण अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें रिहंद जलाशय में जानबूझकर औद्योगिक अपशिष्ट फेंकने के लिए बिजली परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को बंद करने और रद्द करने की मांग की गई थी। जिसमें फ्लाई ऐश डाइक के टूटने की घटना को यूनिट द्वारा लापरवाही पूर्ण कार्य घोषित किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि दरार के कारण, फ्लाई ऐश पूरे कृषि भूमि में फैल गई और छह निर्दोष ग्रामीणों की मौत हो गई, मरने वालों में तीन बच्चे भी शामिल थे, वहीं रिहंद जलाशय में राख के घोल से मवेशी भी बह गए। वहीं अधिवक्ता दुबे ने ये भी आरोप लगाया है कि दरार के कारण पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा हो गई है, जिससे आसपास के निवासियों को ट्यूमर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जिला अधिकारियों के अनुसार कीचड़ ने 25 एकड़ क्षेत्र में फैली फसलों को प्रभावित किया है।