राहतगढ़ में स्थित अद्भुत शिवलिंग
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भगवान शिव कहीं महाकाल के रूप में विराजमान हैं तो कहीं विश्वनाथ के रूप में। देशभर में शिवजी के अनेक मंदिर हैं, जहां वे अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं। ऐसा ही एक मंदिर सागर जिले के राहतगढ़ में है, जहां एक ही शिवलिंग में भगवान शिव 108 रूपों में विराजमान हैं।
800 वर्ष पुराना है मंदिर
सागर के राहतगढ़ में बीना नदी के बनेनी घाट पर शिव मंदिर है। इस शिव मंदिर का निर्माण कपूर परिवार ने 800 वर्ष पहले कराया गया था। बनेनी घाट पर बने शिव मंदिर पर सूरज की पहली किरण मंदिर के द्वार पर पड़ती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान गणेश विराजमान हैं। भगवान गणेश की मूर्ति के ऊपर एक मोर है, जो अपनी चोंच में सर्प को दबाए हुए हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग की यह विशेषता है कि इस शिवलिंग में 108 शिवलिंग एक ही शिवलिंग में बने हुए हैं और एक ही पत्थर पर उन्हें पूर्ण आकार दिया गया है। एक ही शिवलिंग पर जल अर्पित करने से 108 शिवलिंग का फल प्राप्त होता है। एक बेलपत्र चढ़ाने से 108 का फल मिलता है, तो वहीं एक परिक्रमा लगाने से 108 शिवलिंग की परिक्रमा पूर्ण हो जाती है।
अष्ट हाथी और 32 खंभों के ऊपर बना है मंदिर
यह शिव मंदिर वास्तु के हिसाब से बनाया गया है। इसमें दसों दिशाएं और नवग्रह पर बना हुआ है। दक्षिण दिशा में बने हुए नंदी के मुखारबिंद से शिवलिंग पर जल चढ़ाते ही जल बाहर निकलता है। सावन के महीने और अन्य पर्वों पर भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से श्रद्धालु बनेनी घाट पर बने शिवलिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं। मंदिर के पुजारी अरुण पांडे का कहना है कि इस मंदिर की विशेषता यह है कि सूरज की पहली किरण भगवान शिव के ऊपर पड़ती है। अष्ट हाथी और 32 खंभों के ऊपर मंदिर बना हुआ है। मंदिर का उल्लेख शास्त्रों में है। महाशिव पुराण में 16वें, 17वें अध्याय के मध्य में इसका उल्लेख है। स्थानीय निवासी ने बताया किले के समय का मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर की विशेषता यही है कि एक ही पत्थर से शिवलिंग बना है, जिसमें 108 शिवलिंग विराजमान हैं।