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MP election: इस महिला नेता को साथ रखना क्यों बना मोदी-शाह और शिवराज के लिए मजबूरी, भाजपा को खेल बिगड़ने का डर

राहुल संपाल
Updated Wed, 15 Nov 2023 04:40 PM IST

सार

मनावर विधानसभा सीट से टिकट की मांग कर रहीं रंजना बघेल को टिकट न देकर भाजपा ने शिवराम गोपाल कन्नौज को उम्मीदवार बनाया है। इसी बात से वे नाराज़ हो गई थीं। टिकट नहीं मिलने से नाराज बघेल ने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी थी...
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MP Election - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी की चिंता भी बढ़ी हुई नज़र आ रही है। कांग्रेस जहां 2018 के चुनाव की तरह इस बार भी क्षेत्र में ज्यादा सीटें जीतने पर जोर दे रही है, वही भाजपा भी आदिवासी इलाके में ज्यादा सीट जीतकर सत्ता पर काबिज़ होने की आस लगाए हुए है। लेकिन भाजपा के पुराने वफ़ादारों ने ही पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। आदिवासी क्षेत्रों में दख़ल रखने वाली पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता रंजना बघेल को भले ही पार्टी ने मना लिया हो, बावजूद इसके चुनाव में उनकी सक्रियता कम ही दिख रही है।

दरअसल, मनावर विधानसभा सीट से टिकट की मांग कर रहीं रंजना बघेल को टिकट न देकर भाजपा ने शिवराम गोपाल कन्नौज को उम्मीदवार बनाया है। इसी बात से वे नाराज़ हो गई थीं। टिकट नहीं मिलने से नाराज बघेल ने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी थी। लेकिन बाद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मनाने के बाद वे मान गईं। आदिवासी भिलाला समाज से आने वाली बघेल की मनावर के अलावा आदिवासी क्षेत्र कुक्षी, गंधवानी, बड़वानी, बदनावर, धरमपुरी में अच्छी पकड़ है। इन सीटों पर भिलाला समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसके अलावा आदिवासी बेल्ट धार, झाबुआ और जोबट में भी बड़ी संख्या में समाज के लोग हैं।

आदिवासियों को साधने और इन सीटों पर पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा के लिए रंजना बघेल को मनाना जरूरी था। इसी कारण से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बघेल को न केवल मनावर के रोड शो में पूरे समय अपने साथ रखा, बल्कि रैली में भी बघेल के किए विकास कार्यों की जमकर तारीफ़ की। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी इन क्षेत्रों में हुई सभा के दौरान बघेल को अपने साथ रखा। पीएम नरेंद्र मोदी की झाबुआ में हुई रैली में भी बघेल को ख़ासी तवज्जो दी गईं। पीएम ने मंच से आदिवासी क़द्दावर नेता रंजना को बहन कहकर संबोधित किया। रंजना बघेल मनावर विधानसभा सीट से 2008, 2013 से विधायक रह चुकी हैं। जबकि 2018 के चुनाव में बघेल को हार का सामना करना पड़ा था। बघेल 1990 में कुक्षी सीट से भी विधायक रह चुकी हैं।

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MP Election - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी की चिंता भी बढ़ी हुई नज़र आ रही है। कांग्रेस जहां 2018 के चुनाव की तरह इस बार भी क्षेत्र में ज्यादा सीटें जीतने पर जोर दे रही है, वही भाजपा भी आदिवासी इलाके में ज्यादा सीट जीतकर सत्ता पर काबिज़ होने की आस लगाए हुए है। लेकिन भाजपा के पुराने वफ़ादारों ने ही पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। आदिवासी क्षेत्रों में दख़ल रखने वाली पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता रंजना बघेल को भले ही पार्टी ने मना लिया हो, बावजूद इसके चुनाव में उनकी सक्रियता कम ही दिख रही है।

दरअसल, मनावर विधानसभा सीट से टिकट की मांग कर रहीं रंजना बघेल को टिकट न देकर भाजपा ने शिवराम गोपाल कन्नौज को उम्मीदवार बनाया है। इसी बात से वे नाराज़ हो गई थीं। टिकट नहीं मिलने से नाराज बघेल ने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी थी। लेकिन बाद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मनाने के बाद वे मान गईं। आदिवासी भिलाला समाज से आने वाली बघेल की मनावर के अलावा आदिवासी क्षेत्र कुक्षी, गंधवानी, बड़वानी, बदनावर, धरमपुरी में अच्छी पकड़ है। इन सीटों पर भिलाला समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसके अलावा आदिवासी बेल्ट धार, झाबुआ और जोबट में भी बड़ी संख्या में समाज के लोग हैं।

आदिवासियों को साधने और इन सीटों पर पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा के लिए रंजना बघेल को मनाना जरूरी था। इसी कारण से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बघेल को न केवल मनावर के रोड शो में पूरे समय अपने साथ रखा, बल्कि रैली में भी बघेल के किए विकास कार्यों की जमकर तारीफ़ की। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी इन क्षेत्रों में हुई सभा के दौरान बघेल को अपने साथ रखा। पीएम नरेंद्र मोदी की झाबुआ में हुई रैली में भी बघेल को ख़ासी तवज्जो दी गईं। पीएम ने मंच से आदिवासी क़द्दावर नेता रंजना को बहन कहकर संबोधित किया। रंजना बघेल मनावर विधानसभा सीट से 2008, 2013 से विधायक रह चुकी हैं। जबकि 2018 के चुनाव में बघेल को हार का सामना करना पड़ा था। बघेल 1990 में कुक्षी सीट से भी विधायक रह चुकी हैं।

MP Election - फोटो : Amar Ujala
विजयवर्गीय ने कटवाया मेरा टिकट: बघेल

मनवार विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज़ पूर्व मंत्री बघेल ने पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था। बघेल खुद की अनदेखी और अन्याय किए जाने की बात करती नजर आईं थीं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पर टिकट कटवाने का आरोप लगाते हुए बघेल ने कहा था कि  वे गोपाल कन्नौज को कांग्रेस से भाजपा में लाईं और 2013 में गोपाल कन्नौज उनके खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़े थे। जिस गोपाल कन्नौज के लड़के शिवराम कन्नौज ने बूथ लेवल का भी काम नहीं किया, जिसे पार्टी की कोई जानकारी नहीं, उसे उम्मीदवार बना दिया गया। मेरे साथ अन्याय किया गया है, मैं 30 साल से 16-18 घंटे तक भाजपा के लिए काम करती रही। 1990 से मेरे साथ के नेता बड़े-बड़े पदों पर रहे, राष्ट्रीय लेवल तक गए और मुझे दूध से मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया। आदिवासी हूं, इस वजह से मेरे साथ अन्याय किया गया है। मैंने जयस के डॉक्टर राय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उसके बंगले पर जाकर उसे चैलेंज किया। जयस के डॉक्टर राय कैलाश विजयवर्गीय से मिला हुआ है, कैलाश विजयवर्गीय ने ही मेरा टिकट कटवाया है। प्रदेश में मेरे साथ के कई पुराने नेताओं को टिकट दिया गया, लेकिन मुझे नहीं मिला है।

MP Election - फोटो : Amar Ujala
पिछली बार आदिवासी सीटों पर कांग्रेस को मिली थी सफलता

मध्यप्रदेश में कुल आबादी का 21.09 फीसदी आदिवासी हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों का फोकस इनके लिए आरक्षित 47 सीटों पर है। 2003 के विधानसभा चुनाव में 41 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित थीं, जिसमें भाजपा ने 37 जीतीं और सत्ता पर काबिज हुई। 2008 में जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 47 हो गई। भाजपा ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की और सत्ता में वापसी हुई। कांग्रेस को 17 सीटें मिली और एक सीट पर निर्दलीय जीता। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 में से 31 सीटें जीतीं और तीसरी बार सत्ता में वापसी हुई, कांग्रेस को 15 सीटें मिल पाईं। 2018 में कांग्रेस ने आदिवासियों के लिए आरक्षित 30 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और सरकार बनाई। भाजपा को 16 सीटों पर जीत मिली।

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