मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित धरती से करीब 80 फीट नीचे बहती साफ़ और स्वच्छ जलधारा की शृंखला को अब यूनेस्को के जरिए दुनिया देख सकेगी। दरअसल यहां के ऐतिहासिक कुंडी भंडारा को यूनेस्को ने विश्व धरोहरों की अपनी अस्थाई सूची में शामिल किया है, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही यह स्थाई सूची में भी शामिल होकर दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना सकेगा। इसके लिए पिछले कई सालों की मेहनत की जा रही थी, जो अब कामयाब होती दिख रही है।
बता दें कि कुंडी भंडारा अपने आप में एक अद्भुत जलसंरचना है। इसमें 400 सालों से भी अधिक समय से लगातार पानी निकल रहा है। माना जाता है कि यह विश्व की एक मात्र भूमिगत संरचना है, जिसके चलते यह दुनिया के लिए अजूबा माना जाता है। हालांकि कुछ सालों पहले भी यूनेस्को ने कुंडी भंडारा को अपनी सूची में शामिल करने को लेकर प्रयास शुरू किए थे। कुछ कमियों के कारण अब तक कुंडी भंडारा को सूची शामिल नहीं किया गया था। वहीं अब इन कमियों को लगभग पूरा कर लिया गया है।
वर्ष 2006-7 से निरंतर हो रहा था प्रयास
ऐतिहासिक कुंडी भंडारा को यूनेस्को की धरोहर में शामिल करने को लेकर बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनीस ने जिले वासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सभी को बधाई दी है। साथ ही उन्होंने बताया कि इसके लिए वर्ष 2006-7 से निरंतर सबके सहयोग से प्रयास किया जा रहे थे, जिसके बाद इस उपलब्धि को हासिल किया गया है। अब यूनेस्को की मध्य प्रदेश की 6 अस्थायी धरोहर की सूची में से हमारा कुंडी भंडारा भी शामिल हुआ है।
2017 में कर्नाटक में किया था प्रदर्शित
बुरहानपुर विधायक ने बताया कि वर्ष 2013 में यूनेस्को की टीम पहली बार बुरहानपुर आई थी। तब उन्होंने आपत्ति की थी कि यहां पहुंचने का एप्रोच नहीं है और अगर धरोहर विशेष होने के बाद भी एप्रोच में नहीं होती है तो वह शामिल नहीं होती है, जोकि उनकी कंडीशन थी। इसके बाद आरओबी जो अभी स्वीकृत होकर बन रहा है, उससे उनकी जो कंडीशन थी कि अप्रोच सुलभ, सरल और सहज हो वह पूरी हो गई। 2017 में कर्नाटक में हमारी टीम ने एक बार पुनः यूनेस्को के सामने इसको प्रदर्शित किया और अब हमारा यूनेस्को की लिस्ट में शामिल होना लगभग सुनिश्चित है।
विशेषज्ञ और ट्रेंड नौजवानों का दल करेंगे तैयार
विधायक चिटनीस ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में बुरहानपुर ने बहुत उपलब्धि हासिल की है और ईश्वर ने चाहा तो आने वाले समय में कुंडी भंडारा में बैठकर इस पर विस्तृत चर्चा होगी और यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हमें पहचान और प्रतिष्ठा मिली है। अब हमें कुंडी भंडारा की विशेषता बताने के लिए वहां पर विशेषज्ञ और ट्रेंड नौजवानों के दल तैयार करने होंगे। हमें वहां की व्यवस्थाओं को और बेहतर करना होगा, जिससे भविष्य में कोई भी बुरहानपुर आता है तो उसे यूनेस्को की साइट से ध्यान आएगा की बुरहानपुर में एक जगह है जो धरोहरों की लिस्ट में शामिल है। अभी तो हम अस्थाई सूची में शामिल हुए हैं और स्थाई सूची की अनिवार्यता है कि पहले अस्थाई सूची में शामिल हो सके।
अभी कुंडी भंडारे के यह हैं हालात
फिलहाल बुराहनपुर नगर निगम कुंडी भंडारे का रखरखाव करती है। पिछले कई सालों से कुंडी भंडारे को विश्व के पर्यटन के मानचित्र पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि कुंडी भंडारे की कुछ कुंडिया क्षतिग्रस्त भी हुई हैं। साथ ही पिछले लगभग आठ माह से इसकी लिफ्ट भी बंद पड़ी है। यहां की कुंडियों को जालियों से सुरक्षित किया गया है, लेकिन यह काफी नहीं है।
यह है बुराहनपुरी कुंडी भंडारे का इतिहास
स्थानीय इतिहासकार कमरुद्दीन फलक बताते हैं कि शहर से छह किलोमीटर दूर सतपुड़ा की तलहटी में अब्दुल रहीम खान-ए-खाना को एक जल स्रोत मिला था और उनके मन में इस जल को नगर तक पहुंचाने का विचार पलने लगा। जिसके बाद रहीम ने इस काम के लिए अभियांत्रिकी में कुशल अपने कारीगरों से मशविरा किया और इस जल को नगर तक लाने के लिए 1612 ईसवीं में जमीन से 80 फीट नीचे घुमावदार नहरों के निर्माण का कार्य शुरू करवाया। करीब दो साल तक अनवरत चले खनन कार्य और पत्थरों से चिनाई के बाद तीन किलोमीटर लंबी नहर के जरिए शुद्ध पेयजल को सन् 1615 ईसवी में जाली करंज तक पहुंचाया गया। बताया जाता है कि उस समय पूरा शहर इस पानी का उपयोग करता था।