फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्वामित्व योजना: गांव में जमीन-मकान की रजिस्ट्री मुफ्त आज से,क्या है योजना,किसे मिलेगा लाभ,कैसे होगी रजिस्ट्री

Thu, 17 Sep 2026 07:51 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

17 सितंबर से मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में करीब 50 लाख निजी संपत्तियों की रजिस्ट्री मुफ्त होगी। जानिए स्वामित्व योजना क्या है, इसका फायदा किसे मिलेगा, रजिस्ट्री के लिए क्या करना होगा और पंचायत में शिविर कब लगेंगे।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेख यानी संपत्ति के दस्तावेज अब बिना किसी शुल्क के रजिस्टर्ड होंगे।  इसके लिए ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव 17 सितंबर को इंदौर से योजना का प्रदेशव्यापी शुभारंभ करेंगे। योजना के तहत करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का मुफ्त पंजीयन किया जाएगा। इस पर राज्य सरकार पर करीब चार हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  रीवा में प्रसूता की मौत के बाद बड़ा एक्शन: डॉक्टर बर्खास्त, औषधि निरीक्षक निलंबित; ब्लड सेंटर पर FIR के आदेश

क्या है स्वामित्व योजना?
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्र में लोगों की संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। दरअसल कई परिवारों के पास संपत्ति का मालिकाना हक है, लेकिन उसका कोई वैध रजिस्टर्ड दस्तवेज नहीं हैं। ऐसे लोगों के लिए केंद्र सरकार ने 2020 में स्वामित्व योजना शुरू की थी। ऐसे लोगों की संपत्ति के अभिलेख तैयार कर दस्तावेजों का पंजीयन कराया जा रहा है। खास बात यह है कि इसके लिए हितग्राही से स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। पूरी राशि राज्य सरकार देगी। प्रदेश में अब तक 41,568 गांवों में 68.47 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का इस अभियान के तहत मुफ्त पंजीयन होगा। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  मध्यप्रदेश: जल निगम का नाम बदला, जानें अब किस नाम से जाना जाएगा’; MD की टेंडर मंजूरी सीमा 5 से बढ़कर 25 करोड़

किसे मिलेगा फायदा?
इस योजना का लाभ उन ग्रामीण लोगों को मिलेगा, जिनकी निजी संपत्ति के अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत तैयार हो चुके हैं। पंजीयन के बाद संपत्ति का दस्तावेजी अधिकार और मजबूत होगा। इस दस्तावेज के आधार पर लोग घर बनाने, कारोबार, खेती या दूसरी आर्थिक जरूरतों के लिए लोन ले सकेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक गतिविधियों और आजीविका को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

क्या पूराना विवाद समाप्त हो जाएगा? 
योजना के तहत सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से जमीन का पुराना विवाद खत्म नहीं माना जाएगा। यदि किसी संपत्ति पर पहले से किसी अन्य व्यक्ति का स्वामित्व दावा या कानूनी विवाद है, तो वह पक्ष राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में अपना मामला रख सकता है। रजिस्ट्री मौजूदा स्वामित्व रिकॉर्ड या पट्टे में दर्ज व्यक्ति के नाम ही की जाएगी। केवल जमीन पर कब्जा होने या किसी व्यक्ति के दावा करने से उसके नाम स्वामित्व दर्ज कर रजिस्ट्री नहीं हो जाएगी।

ये भी पढ़ें-  मध्यप्रदेश: भोपाल में पुलिस ही करा रही थी जुए का खेल! थाना प्रभारी समेत 3 निलंबित, दो लाख से ज्यादा जब्त

मुफ्त रजिस्ट्री के लिए क्या करना होगा?
पंजीयन के लिए हितग्राही के आबादी भूखंड की लैंड लिंकिंग और समग्र आईडी की ई-केवाईसी जरूरी होगी। प्रक्रिया ‘सारा’ मोबाइल एप के माध्यम से होगी। इसके बाद ‘संपदा’ एप पर पंजीयन अधिकारी विलेख यानी रजिस्ट्री का पंजीयन करेंगे। भूमि स्वामी की आधार ई-केवाईसी और लैंड लिंकिंग का काम भूलेख एप/पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। 

ये भी पढ़ें-  ओवैसी के मिसाइल वाले बयान पर रामेश्वर शर्मा का जवाब: बोले- बैरिस्टर हो, बदतमीजी की भाषा छोड़ो; फिर कही ये बात

पंचायत में कब लगेंगे शिविर?
लोगों को पंजीयन के लिए दूर जाने की जरूरत न पड़े, इसके लिए ग्राम और पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। ये शिविर तीन चरणों में होंगे। शिविर की जानकारी संबंधित जिलों की ओर से हितग्राहियों को दी जाएगी।
विज्ञापन

पहला चरण: 17 से 19 सितंबर
दूसरा चरण: 24 से 26 सितंबर
तीसरा चरण: 1 से 3 अक्टूबर

गांव में ही होगा काम?
सरकार ने प्रक्रिया के लिए स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। पटवारी को निष्पादन अधिकारी बनाया गया है, जबकि तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पीसीओ और एडीईओ को पंजीयन अधिकारी बनाया गया है। इससे ज्यादातर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो सकेगी। इस प्रक्रिया में सबसे पहले हितग्राही का स्वामित्व रिकॉर्ड में नाम देखा जाएगा। इसके बाद पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित होंगे। पटवारी वीडियो केवासी करेंगे और अधिकारी दस्तावेज की जांच करेंगे। इसके बाद संपदा 2.0 पर डीड तैयार होगी, जिसके बाद पर रजिस्ट्री होंगी। 

ये भी पढ़ें-  एमपी: छात्रों की गूंज का प्लान ‘डीकोड’, एक तीर से कई निशाने साधेंगे राहुल गांधी, जानें इंदौर को ही क्यों चुना?

रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज कैसे मिलेगा?
पंजीयन पूरा होने के बाद रजिस्ट्री का पंजीयन विलेख हितग्राही के मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। 

ये भी पढ़ें-  एमपी: सागर शराब कांड के बाद जागा विभाग, अब अवैध अहातों पर कार्रवाई, दोबारा घटना हुई तो अफसरों पर दर्ज होगा केस

कितने समय में पूरी होगी योजना?
सरकार ने प्रदेशभर में यह अभियान एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जिला स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। लोगों की मदद के लिए स्टेट लेवल डेडिकेटेड हेल्पडेस्क भी बनाया जाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है योजना?
जानकारी अनुसार, स्वामित्व योजना के तहत तैयार अधिकार अभिलेखों के मुफ्त पंजीयन का फैसला लेने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्ति का मजबूत दस्तावेजी अधिकार मिलेगा। यानी अब एक और सरकारी दस्तावेज उनके पास होगा। इससे अब उनको अपनी संपत्ति पर लोन लेने में भी मदद मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे आने वाले समय संपत्ति को लेकर होने वाले विवाद भी समाप्त होंगे। 


पटवारियों की चिंता क्या है?
वहीं, प्रदेश के पटवारी पूरी प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। दरअसल पटवारियों का विरोध रजिस्ट्री की प्रक्रिया से ज्यादा उससे जुड़ने वाली जिम्मेदारी और कानूनी जवाबदेही को लेकर है। उनका कहना है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज में ‘रजिस्ट्रीकर्ता’ के रूप में उनका नाम होने से भविष्य में संपत्ति विवाद की स्थिति में उन्हें भी पक्षकार बनाया जा सकता है। पटवारी यह सवाल उठा रहे हैं कि खसरा, नक्शे या ड्रोन सर्वे के रिकॉर्ड में बाद में कोई त्रुटि सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उनका तर्क है कि रिकॉर्ड में सुधार या विवाद के निपटारे का अधिकार उनके पास नहीं है, इसलिए जिम्मेदारी के साथ अधिकार भी स्पष्ट होने चाहिए। यह मामला कैबिनेट में भी उठा। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने पटवारियों की आपत्ति रखी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है, इसलिए पटवारियों को चिंता की जरूरत नहीं है और कलेक्टर उन्हें समझाएं।



 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें